बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर! नीतीश का इस्तीफा… और सम्राट की ताजपोशी का सस्पेंस खत्म
डेली24भारत डेस्क: बिहार की राजनीति में मंगलवार (14 अप्रैल) को ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने सत्ता की पूरी तस्वीर बदल दी। लंबे समय से मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे नीतीश कुमार ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर सियासी हलकों में हलचल मचा दी। इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद लोक भवन के अंदर उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सम्राट चौधरी को बधाई दी। इसी एक संकेत ने मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर चल रहा सस्पेंस लगभग खत्म कर दिया।
इसके बाद बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को नेता चुने जाने के साथ ही साफ हो गया कि अब बिहार की कमान उनके हाथों में आने वाली है। बताया जा रहा है कि सम्राट चौधरी बुधवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह पहली बार होगा जब बिहार में बीजेपी का कोई नेता मुख्यमंत्री बनेगा—जिसे राज्य की राजनीति का ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।
बिहार राजनीति: बिहार में नीतीश युग का अंत, सम्राट चौधरी होंगे बिहार के अगले CM, BJP विधायक दल के नेता चुने गए।@NitishKumar @samrat4bjp #SamratChaudhary #NitishKumar #Bihar pic.twitter.com/ihYhvk3hpL
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बधाइयों की बौछार, नेताओं ने जताया भरोसा
सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगते ही राजनीतिक गलियारों में बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “पुत्रवत सम्राट चौधरी को नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई, बिहार को नया सम्राट मुबारक हो।” वहीं उपेंद्र कुशवाहा ने भी उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए सफल कार्यकाल की उम्मीद जताई।
आरजेडी की पाठशाला से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआती सीख लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी से ली। उनके पिता शकुनी चौधरी भी कभी लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। यही कारण रहा कि उनकी राजनीतिक सोच की मजबूत बुनियाद आरजेडी के दौर में तैयार हुई।
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साल 1999 में सम्राट चौधरी को राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री बनने का मौका मिला, जहां उन्हें हॉर्टिकल्चर विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद वे परबत्ता विधानसभा सीट से 2000 और 2010 में विधायक चुने गए और लंबे समय तक पार्टी के साथ सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
जेडीयू से बीजेपी तक—बदलती रणनीति, बढ़ती ताकत
करीब दो दशक तक आरजेडी में रहने के बाद 2014 में सम्राट चौधरी जेडीयू में शामिल हुए, लेकिन कुछ ही वर्षों बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं और धीरे-धीरे वे पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।
2020 के विधानसभा चुनावों में एनडीए की सरकार बनने के बाद वे मंत्री बने और मार्च 2023 में उन्हें प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां उन्होंने संजय जायसवाल की जगह ली। इसके बाद से ही वे बिहार की राजनीति में तेजी से मजबूत होते गए।
नीतीश युग का अंत या नई राजनीति की शुरुआत?
नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है। अब सबकी नजरें सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण और नई कैबिनेट के गठन पर टिकी हैं—क्योंकि यही तय करेगा कि बिहार की राजनीति का अगला अध्याय किस दिशा में आगे बढ़ेगा।