Daily 24 भारत डेस्क: संसद के विशेष सत्र में पेश किए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम और उससे जुड़े विधेयकों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. समाजवादी पार्टी (सपा) ने संविधान में प्रस्तावित बदलावों का जोरदार विरोध किया और इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया.
सपा पर अमित शाह का तीखा हमला -“इनकी चले तो घरों की भी जाति तय कर दें” @samajwadiparty @BJP4India @AmitShah #AmitShah #AkhileshYadav #Delimitation pic.twitter.com/dGiPxd6n5G
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) April 16, 2026
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने संसद में आरोप लगाया कि सरकार द्वारा लाया गया विधेयक संविधान के मूल ढांचे के साथ छेड़छाड़ करने वाला है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक इस आरक्षण में ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं को शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक उनकी पार्टी इसका समर्थन नहीं करेगी.
धर्मेंद्र यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सपा सांसद ने गलत बात कही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय संविधान में कहीं भी धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है और इस तरह की मांग असंवैधानिक है. इस मुद्दे पर सपा प्रमुख और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने भी आपत्ति जताई. उन्होंने गृह मंत्री के बयान को असंवैधानिक बताते हुए सवाल किया कि क्या मुस्लिम महिलाएं “आधी आबादी” का हिस्सा नहीं हैं. इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि यदि सपा चाहती है तो वह अपने स्तर पर मुस्लिम महिलाओं को टिकट दे सकती है, इसमें सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. हालांकि उन्होंने दोहराया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के अनुरूप नहीं है.
इससे पहले अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि संविधान संशोधन से पहले जनगणना का इंतजार क्यों नहीं किया जा रहा है. उन्होंने जाति जनगणना की मांग को भी दोहराया. इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने जानकारी दी कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार ने जाति जनगणना कराने का निर्णय ले लिया है. उन्होंने बताया कि फिलहाल हाउसलिस्टिंग का काम चल रहा है और आगामी जनगणना में जाति का कॉलम भी शामिल किया जाएगा. इस पूरे मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है, जिसमें आरक्षण, संविधान और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे केंद्र में बने हुए हैं.