डेली24 भारत डेस्क: नोएडा में हाल ही में हुए मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन के बाद जिले की जिलाधिकारी मेधा रूपम एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं. प्रशासनिक फैसलों, श्रमिक मुद्दों और कानून-व्यवस्था को संभालने के उनके तरीके पर लगातार नजर बनी हुई है. ऐसे में यह जानना अहम हो जाता है कि आखिर कौन हैं मेधा रूपम, जिन पर इस समय पूरे गौतम बुद्ध नगर जिले की जिम्मेदारी है.
मेधा रूपम उत्तर प्रदेश कैडर की 2014 बैच की आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2013 में ऑल इंडिया 10वीं रैंक हासिल की थी, जो उनकी मेधावी पृष्ठभूमि को दर्शाती है. उनका जन्म आगरा में हुआ, लेकिन उनके पिता ज्ञानेश कुमार की केरल में तैनाती के कारण उनकी प्रारंभिक शिक्षा वहीं पूरी हुई. शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका प्रदर्शन बेहद शानदार रहा. उन्होंने सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से इकोनॉमिक्स में बीए किया है.
दिलचस्प बात यह है कि मेधा रूपम सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेलों में भी सक्रिय रही हैं. वर्ष 2008 में उन्होंने शूटिंग में हाथ आजमाया और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची. यह उनकी बहुआयामी प्रतिभा को दर्शाता है. मसूरी में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी पहली नियुक्ति बरेली में सहायक मजिस्ट्रेट के रूप में हुई थी. इसके बाद उन्होंने मेरठ, बागपत, बाराबंकी, लखनऊ और हापुड़ जैसे जिलों में विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई.
मेधा रूपम 29 जुलाई 2025 से गौतम बुद्धनगर की जिलाधिकारी के पद पर तैनात हैं. इससे पहले वह कासगंज की डीएम रह चुकी हैं और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में एसीईओ के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं. उनके प्रशासनिक अनुभव और विविध जिलों में काम करने का अनुभव उन्हें एक मजबूत और सक्षम अधिकारी बनाता है. हाल ही में नोएडा में हुए मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन से पहले भी मेधा रूपम सक्रिय नजर आई थी. उन्होंने श्रमिकों और औद्योगिक इकाइयों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की थी और शांति बनाए रखने की अपील की थी. उन्होंने कई बैठकों के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान बातचीत से निकाला जाए.
प्रदर्शन के बाद उन्होंने श्रमिकों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की. इनमें ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, सप्ताह में एक दिन साप्ताहिक अवकाश, और रविवार को काम कराने पर अतिरिक्त भुगतान शामिल है. इसके अलावा, श्रमिकों को समय पर वेतन देने, वेतन पर्ची उपलब्ध कराने और बोनस का भुगतान 30 नवंबर तक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने हर फैक्ट्री में यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति गठित करने का भी आदेश दिया है, जिसकी अध्यक्ष महिला होगी। साथ ही शिकायत पेटी लगाने और श्रमिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने जैसे कदम भी उठाए गए हैं. ये फैसले दर्शाते हैं कि वह सिर्फ कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों और सम्मान को भी प्राथमिकता देती हैं.
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब मेधा रूपम सुर्खियों में आई हैं. इससे पहले नोएडा में एक इंजीनियर की गड्ढे में गिरकर मौत के मामले में भी उनके प्रशासन पर सवाल उठे थे. ऐसे मामलों ने उनके कामकाज को लेकर बहस जरूर खड़ी की, लेकिन साथ ही उन्हें एक सक्रिय और जवाबदेह अधिकारी के रूप में भी सामने लाया. मेधा रूपम एक ऐसी युवा आईएएस अधिकारी हैं जो प्रशासनिक सख्ती और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती नजर आती हैं. नोएडा जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक जिले में उनकी भूमिका बेहद अहम है, और आने वाले समय में उनके फैसले यह तय करेंगे की वह इस चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को किस तरह संभालती हैं.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर