Daily 24 भारत डेस्क: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में कुछ ही समय रह गया है, उससे पहले राज्य का राजनीतिक माहौल बेहद गरम हो गया है. ऐसे में राजनीतिक पार्टियों का एक-दुसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाज़ी अपने चरम पर पहुंच गई है. इसी बीच बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान ने सियासत में हलचल को और भी तेज कर दिया है. एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि उन्हें सभी अधिकारियों का “नाम, काम और ठिकाना” पता है और अगर चुनाव में उन्होंने ठीक से काम नहीं किया तो “सबका हिसाब होगा.” उन्होंने यह भी कहा कि “कल भाजपा नहीं रहेगी,” जिसे विपक्ष ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है. भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान को प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया है और चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है.
यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी ने इस तरह के बयान दिए हैं. इससे पहले जुलाई 2025 में भी उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि वे चुनाव आयोग के नहीं बल्की राज्य सरकार के कर्मचारी हैं और उन्हें राज्य के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए. उस वक्त भी उनके इस बयान से काफी बवाल हुआ था.
इसी बीच, राज्य सरकार की तृणमूल कांग्रेस के कुछ समर्थकों पर मतदाताओं को धमकाने के आरोप भी लगे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक टीएमसी समर्थक लोगों से कहता दिखाई दे रहा है कि उन्हें सिर्फ टीएमसी को ही वोट देना होगा और पार्टी को यह पता चल जाएगा कि किसने किसे वोट दिया. हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं नहीं की जा सकी है.
राज्य में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है, जिसमें कई संवेदनशील सीटों पर वोट डाले जाएंगे. चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की बात कही है. लगातार बढ़ते इस राजनीतिक तनाव के बीच अब सभी की नजरें मतदान प्रक्रिया और उसके निष्पक्ष रुप से होने पर टिकी हुई हैं.