Daily 24 भारत डेस्क: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर संकट में डाल दिया है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस का व्यापार होता है. हालिया घटनाक्रम में दावा किया गया कि पहले व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता खोला गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद फिर से स्थिति बिगड़ गई और जहाजों पर हमले की खबरें सामने आईं. इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग और ऊर्जा बाजार दोनों पर दबाव बढ़ गया है.
भारत का प्लान-B: ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक व्यवस्था
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, इसलिए यह संकट उसके लिए बेहद अहम है. सरकार ने किसी भी संभावित बाधा से निपटने के लिए मजबूत “प्लान-B” तैयार किया है. भारत के पास फिलहाल लगभग 60 दिनों से अधिक का कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल का रणनीतिक भंडार मौजूद है. इसके अलावा एलएनजी और एलपीजी का भी पर्याप्त स्टॉक सुरक्षित रखा गया है, जिससे अल्पकालिक आपूर्ति संकट से निपटा जा सके. सरकार ने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाते हुए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और लैटिन अमेरिकी देशों से अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की है. इससे होर्मुज पर निर्भरता को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
कूटनीति, चुनौतियां और आगे की रणनीति
भारत ने इस संकट में केवल आर्थिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक रणनीति भी अपनाई है. ईरान और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ संवाद बनाए रखते हुए भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है. अब तक कई भारतीय जहाज इस क्षेत्र से सुरक्षित निकल चुके हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है.
हालांकि, खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है. यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे भारत में महंगाई, परिवहन लागत और औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ेगा. फिलहाल भारत “वेट एंड वॉच” की नीति पर काम कर रहा है और साथ ही वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर रहा है. स्थिति बिगड़ने पर भारत को ऊर्जा सुरक्षा के लिए और कड़े रणनीतिक फैसले लेने पड़ सकते हैं.