डेली 24 भारत : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चिंता बन चुका है. खासतौर पर डिमेंशिया जैसी बीमारियाँ उम्र के साथ तेजी से बढ़ रही हैं. दुनियाभर में लाखों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं, जो धीरे-धीरे व्यक्ति की याददाश्त, सोचने की क्षमता और दैनिक जीवन के कामों को प्रभावित करती है, लेकिन एक स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि वेट ट्रेनिंग यानी वजन उठाने वाले एक्सरसाइज से डिमेंशिया का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.
डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है, जो याददाश्त, ध्यान और सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, साल 2021 तक दुनिया भर में लगभग 5 करोड़ 70 लाख लोग इससे पीड़ित थे. हालांकि कई स्टडीज में इस बात की पुष्टि हुई है कि लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके डिमेंशिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसमें नियमित एक्सरसाइज की महत्वपूर्ण भूमिका है. डिमेंशिया में व्यक्ति की मेमोरी लॉस, सोचने-समझने की क्षमता में गिरावट और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है. इसका सबसे आम रूप अल्ज़ाइमर रोग है. आमतौर पर यह बुजुर्गों में अधिक देखा जाता है, लेकिन अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, तनाव, और शारीरिक निष्क्रियता इसे जल्दी भी जन्म दे सकती है.
हाल ही में ‘GeroScience’ जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज बुजुर्गों के ब्रेन को डिमेंशिया से बचाने में मदद कर सकती है. स्टडी में यह भी पाया गया कि इसका फायदा उन लोगों को भी मिलता है, जिनमें पहले से ही डिमेंशिया के हल्के लक्षण मौजूद हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, वेट ट्रेनिंग शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क को भी मजबूत बनाती है. यह ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है जिससे मस्तिष्क को अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलते हैं. मसल स्ट्रेंथ बढ़ने से शरीर में सूजन कम होती है, जो न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बड़ा कारण है. वेट ट्रेनिंग से ब्रेन में नए न्यूरॉन बनने की प्रक्रिया सक्रिय होती है. यह स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल को कम करती है और एंडोर्फिन जैसे अच्छे हार्मोन को बढ़ाती है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है.
सिर्फ वेट ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि संतुलित आहार, नींद, मानसिक सक्रियता और सामाजिक जुड़ाव भी दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. शोध में यह भी पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से पहेलियाँ हल करते हैं, नई चीजें सीखते हैं, और दूसरों के साथ सामाजिक रूप से सक्रिय रहते हैं, उनमें भी डिमेंशिया का जोखिम काफी कम रहता है.
साइंस स्टडी ने यह साफ कर दिया है कि वेट ट्रेनिंग केवल शरीर की मजबूती के लिए नहीं, बल्कि दिमाग की सेहत के लिए भी वरदान है. उम्र चाहे कोई भी हो, अगर आप नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, तो न सिर्फ आप मजबूत रहेंगे बल्कि आपकी याददाश्त भी लंबे समय तक दुरुस्त रहेगी. इसलिए अगर आप अपने दिमाग को उम्र के असर से बचाना चाहते हैं, तो आज से ही वेट ट्रेनिंग को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लें, ताकि तन के साथ मन भी फिट और एक्टिव रहे.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर