Daily 24 भारत डेस्क: दिल्ली 2020 दंगों के बड़े षड्यंत्र मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई। दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद, शरजील इमाम समेत अन्य आरोपियों की जमानत का कड़ा विरोध करते हुए हलफनामा दायर किया, कहा- ये जमानत के हकदार नहीं।
पुलिस का दावा है कि आरोपियों के खिलाफ प्रत्यक्ष, अकाट्य दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य हैं, जो सांप्रदायिक आधार पर राष्ट्रव्यापी दंगों की योजना में उनकी गहरी संलिप्तता दर्शाते हैं। साजिश का मकसद- सांप्रदायिक सद्भाव नष्ट कर देश की संप्रभुता पर प्रहार करना। भीड़ को सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने और सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाया गया।
खास बात ये है कि ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान साजिश रची गई, ताकि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा जाए और सीएए को मुस्लिम नरसंहार के रूप में ग्लोबल मुद्दा बनाया जाए। सीएए को ‘शांतिपूर्ण विरोध’ के कवर में कट्टरपंथी उत्प्रेरक बनाया। परिणाम- 53 मौतें, अरबों का नुकसान, 753 एफआईआर। साजिश पूरे भारत में दोहराने की कोशिश।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आरोपियों ने ट्रायल में देरी के लिए सुनियोजित साजिश की। जस्टिस अरविंद कुमार और एन.वी. अंजारिया की बेंच ने सुनवाई शुक्रवार तक टाली। याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की, जबकि एएसजी एस.वी. राजू ने पुलिस का पक्ष रखा।