डेली24भारत डेस्क: इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 का रोमांच धीरे-धीरे अपने चरम की ओर बढ़ रहा है और अब इस सीजन के सभी लीग मुकाबलों का पूरा शेड्यूल भी सामने आ चुका है। पहले बीसीसीआई ने शुरुआती 20 मैचों का कार्यक्रम जारी किया था, जिससे फैंस में उत्सुकता बढ़ी, लेकिन बाद में शेष 50 मुकाबलों का शेड्यूल घोषित होते ही पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर लगभग साफ हो गई। इसके साथ ही एक दिलचस्प और संभावित विवाद का मुद्दा भी सामने आने लगा है—कुछ टीमों को दिन के मुकाबले ज्यादा खेलने पड़ रहे हैं, जबकि कुछ टीमों को बेहद कम डे-गेम मिले हैं।
दरअसल, आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में मैच का समय टीमों की रणनीति और प्रदर्शन पर सीधा असर डालता है। यही वजह है कि दोपहर में खेले जाने वाले मैचों की संख्या हर टीम के लिए काफी मायने रखती है। आईपीएल 2026 के शेड्यूल के अनुसार, दो टीमें ऐसी हैं जिन्हें इस सीजन में सबसे ज्यादा यानी 4-4 डे-गेम खेलने होंगे। ये टीमें हैं सनराइजर्स हैदराबाद और दिल्ली कैपिटल्स। लगातार कई दोपहर के मुकाबले खेलने से इन टीमों को अलग तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा, जो उनके प्रदर्शन पर सकारात्मक या नकारात्मक—दोनों तरह का असर डाल सकता है।
इसके अलावा पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स को इस सीजन में 3-3 दोपहर के मैच खेलने होंगे। वहीं चार टीमें—राजस्थान रॉयल्स, मुंबई इंडियंस, कोलकाता नाइट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु—ऐसी हैं जिन्हें 2-2 डे-गेम खेलने का मौका मिला है। दूसरी तरफ चेन्नई सुपर किंग्स और गुजरात टाइटन्स ऐसी टीमें हैं जिन्हें सिर्फ 1-1 डे-गेम ही मिला है। इस असमानता को लेकर आगे चलकर चर्चा या बहस होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि मैच का समय अक्सर परिणामों को प्रभावित करता है।
आईपीएल 2026 के 19वें सीजन में कुल 10 दिन ऐसे निर्धारित किए गए हैं जब डबल-हेडर मुकाबले खेले जाएंगे। इन दिनों पहला मैच दोपहर 3:30 बजे शुरू होगा, जबकि दूसरा मुकाबला शाम 7:30 बजे भारतीय समयानुसार खेला जाएगा। डबल-हेडर वाले दिन दर्शकों के लिए उत्साह दोगुना हो जाता है, क्योंकि उन्हें एक ही दिन में दो हाई-वोल्टेज मैच देखने को मिलते हैं।
अब सवाल उठता है कि आखिर दिन और रात के मैचों में इतना अंतर क्यों माना जाता है? इसका जवाब मैदान की परिस्थितियों और मौसम से जुड़ा हुआ है। दोपहर के मैचों में आमतौर पर ओस (ड्यू) का असर नहीं होता, जिससे गेंद सूखी रहती है और स्पिन गेंदबाजों को ज्यादा मदद मिलती है। पिच भी अक्सर सूखी और धीमी होती है, जिससे बल्लेबाजों के लिए रन बनाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा कई शहरों में तेज धूप और गर्म मौसम खिलाड़ियों की फिटनेस और सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा लेते हैं।
वहीं शाम या रात के मैचों में परिस्थितियां काफी अलग होती हैं। जैसे-जैसे रात बढ़ती है, मैदान पर ओस गिरने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे गेंद फिसलन भरी हो जाती है और स्पिनरों की पकड़ कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में तेज गेंदबाजों को अतिरिक्त स्विंग और सहायता मिलने की संभावना रहती है, जबकि बल्लेबाजों के लिए गेंद को सही तरीके से खेलना कभी-कभी आसान हो जाता है। यही कारण है कि कई टीमें टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना पसंद करती हैं।
इस तरह देखा जाए तो आईपीएल 2026 में डे-गेम और नाइट-गेम का संतुलन सिर्फ शेड्यूल का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह टीमों की रणनीति, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टूर्नामेंट के परिणामों को भी प्रभावित करने वाला एक अहम पहलू बन सकता है। यही कारण है कि फैंस और विशेषज्ञ दोनों इस बार मैचों के समय और परिस्थितियों पर खास नजर बनाए हुए हैं।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर