डेली24 भारत डेस्क: हाल ही में एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संभावित युद्ध को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई थी. उनके अनुसार, उन्होंने भारत और पाकिस्तान को 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद दोनों देश संघर्ष विराम के लिए तैयार हुए. इस बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बहस छेड़ दी है और भारत-पाक संबंधों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है.
व्हाइट हाउस में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की एक बैठक के दौरान ट्रंप ने यह दावा दोहराया. उन्होंने कहा कि हाल ही में उनकी मुलाकात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से हुई थी. ट्रंप के अनुसार, इस बैठक में शरीफ ने उनके सामने कहा कि ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाकर लगभग ढाई करोड़ लोगों की जान बचाई. ट्रंप ने यह भी कहा कि उस समय हालात बेहद गंभीर थे और दोनों पक्षों के फाइटर जेट गिराए जा रहे थे. पहले उन्होंने पांच लड़ाकू विमानों के गिरने की बात कही थी, लेकिन अब उन्होंने संख्या बढ़ाकर 11 कर दी है.
ट्रंप ने विस्तार से बताते हुए कहा की उन्होंने दोनों देशों के नेताओं को सीधे फोन किया. उन्होंने दावा किया की उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि संघर्ष नहीं रोका गया तो अमेरिका दोनों देशों पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा देगा. ट्रंप के शब्दों में वे दोनों लड़ना चाहते थे, लेकिन जब बात पैसों की आई तो उन्होंने पीछे हटना बेहतर समझा. उनके मुताबिक आर्थिक दबाव ने युद्ध की स्थिति को शांत करने में अहम भूमिका निभाई.
हालांकि, भारत ने इन दावों को लगातार खारिज किया है. नई दिल्ली का कहना है कि संघर्ष विराम पूरी तरह द्विपक्षीय प्रक्रिया का परिणाम था. भारत के अनुसार, पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष को फोन किया था, जिसके बाद बातचीत के जरिए स्थिति को सामान्य किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद में स्पष्ट कहा था की किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं ली गई. भारत का यह रुख उसकी लंबे समय से चली आ रही नीति के अनुरूप है, जिसमें वह कश्मीर और भारत-पाक संबंधों को द्विपक्षीय मुद्दा मानता है.
पाकिस्तान की ओर से हालांकि ट्रंप के दावों को सकारात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है. विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण चाहता रहा है. 1972 के Simla Agreement के बाद दोनों देशों ने आपसी सहमति से विवादों को द्विपक्षीय रूप से सुलझाने का सिद्धांत अपनाया था. ऐसे में ट्रंप के दावे पाकिस्तान के लिए एक अवसर की तरह देखे जा रहे हैं, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान फिर से इस मुद्दे की ओर आकर्षित कर सके.
ट्रंप पहले भी कई बार यह कह चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराया था. कुछ मौकों पर उन्होंने स्वयं को संभावित मध्यस्थ के रूप में भी पेश किया था. यहां तक कि पाकिस्तान की ओर से उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की खबरें भी सामने आई थी. लेकिन भारत ने हर बार स्पष्ट किया है कि वह किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता.
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इन बयानों के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है. अमेरिका में चुनावी माहौल के दौरान विदेश नीति की उपलब्धियों को उजागर करना राजनीतिक रूप से फायदेमंद माना जाता है. वहीं भारत के लिए यह मुद्दा उसकी संप्रभुता और कूटनीतिक सिद्धांतों से जुड़ा है, इसलिए वह ऐसे किसी भी दावे को सिरे से खारिज करता है.
ट्रंप के दावे और भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बीच स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है. एक ओर ट्रंप इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, तो दूसरी ओर भारत इसे पूरी तरह से द्विपक्षीय प्रक्रिया बता रहा है. सच चाहे जो भी हो, इतना तय है कि भारत-पाक संबंधों में संवेदनशीलता बरकरार है और ऐसे बयान क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करते रहेंगे. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मुद्दे पर कोई नई कूटनीतिक पहल सामने आती है या फिर यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहता है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर