डेली24भारत डेस्क: उत्तर प्रदेश के हर जिले में सामान्य थाना के साथ कम से कम एक महिला थानेदार की तैनाती का जो फॉर्मूला पहले लागू था, वह अब लगभग पूरी तरह टूट चुका है। यह फॉर्मूला लंबे समय से यह सुनिश्चित करता था कि प्रत्येक जिले में महिलाओं की पुलिसिंग नेतृत्व में भूमिका बनी रहे और थानों में महिलाओं की मौजूदगी सुनिश्चित हो। लेकिन अब, गोरखपुर-बस्ती रेंज के सात जिलों के कुल 140 थानों में केवल सिद्धार्थनगर जिले के जो गया कोतवाली पर ही महिला थानेदार तैनात हैं।
गोरखपुर जिले की स्थिति सबसे चिंताजनक है। पिछले छह महीनों से किसी भी महिला निरीक्षक को थाने का चार्ज नहीं दिया गया। इस कमी का पहला संकेत तब मिला जब इंस्पेक्टर अर्चनार्चन सिंह को खजनी थाने से हटाया गया। उसके बाद न तो कोई महिला अधिकारी थाने का प्रभारी बनाई गई, न ही किसी अन्य थाने में महिला नेतृत्व की तैनाती की गई।
गोरखपुर में महिला थानेदारों की तैनाती की शुरुआत तिवारीपुर थाने से हुई थी और यह व्यवस्था लगभग छह महीने पहले तक खजनी थाने पर लागू रही। इस प्रणाली के तहत महिला थानेदार न सिर्फ कानून व्यवस्था की निगरानी करती थीं, बल्कि थाने में महिलाओं और बच्चों से संबंधित मामलों की देखरेख भी करती थीं।
वर्तमान स्थिति यह है कि अगर सिद्धार्थनगर जिले की जो गया कोतवाली में प्रभारी निरीक्षक मीरा चौहान को हटा दिया जाए, तो गोरखपुर-बस्ती रेंज के अन्य किसी भी जिले में महिला थानेदार की जिम्मेदारी नहीं बचेगी। यह स्थिति न सिर्फ फॉर्मूले के विफल होने का प्रतीक है, बल्कि महिला सुरक्षा और पुलिसिंग में असंतुलन का भी स्पष्ट संकेत है।
सात जिलों में महिला इंस्पेक्टरों की संख्या महज सात के आसपास बताई जा रही है। कुछ जिलों में तो एक भी महिला इंस्पेक्टर तैनात नहीं है। हालांकि महिला सब-इंस्पेक्टरों की कुल संख्या पर्याप्त है, पुलिस सूत्रों के अनुसार उनके अनुभव की कमी और पद की बाध्यता के कारण उन्हें थाने का प्रभारी बनाने की जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला निरीक्षकों की इस कमी ने फॉर्मूले की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर की है। यह न सिर्फ प्रशासनिक कमजोरी है, बल्कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों और घरेलू हिंसा जैसे मामलों की त्वरित और संवेदनशील जांच में भी बाधा डाल रही है।
एडीजी गोरखपुर जोन, मुथा अशोक जैन ने बताया कि यह व्यवस्था पहले लागू थी, लेकिन वर्तमान में क्यों तैनाती नहीं की जा रही, इसे लेकर जिले के पुलिस कप्तानों से बातचीत की जाएगी। उनका कहना है कि जल्द ही कोशिश की जाएगी कि हर जिले में कम से कम एक महिला थानेदार को चार्ज दिया जाए और यह फॉर्मूला पुनः सही तरीके से लागू हो।
विशेष रूप से यह देखा जा रहा है कि थानों में महिला नेतृत्व की कमी न सिर्फ पुलिसिंग की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है, बल्कि महिला नागरिकों की सुरक्षा और शिकायत निवारण की प्रक्रिया को भी कमजोर बना रही है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पूरे गोरखपुर-बस्ती रेंज में पुलिसिंग और महिला सुरक्षा प्रणाली गंभीर संकट में पड़ सकती है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर