डेली24भारत डेस्क: उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 9 फरवरी से शुरू हुआ और 20 फरवरी तक चलेगा। इस सत्र की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि यह योगी सरकार 2.0 का आखिरी बजट सत्र है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत होने वाला बजट राज्य की नीतियों, विकास योजनाओं और आर्थिक दिशा तय करेगा।
आर्थिक सर्वेक्षण पेश: प्रदेश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर
संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट सत्र के दौरान पहली बार विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। इस रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ रही है। वित्त मंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश का GDP 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है और अगले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 36 लाख करोड़ रुपये के पार पहुँच सकता है। इस सर्वेक्षण ने यह स्पष्ट किया कि प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में निवेश, बुनियादी ढांचा और उद्योगों की भागीदारी अहम भूमिका निभा रही है।
सदन में हंगामा: विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया
सत्र की शुरुआत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण से हुई, लेकिन समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने इसे हंगामे के चलते बाधित कर दिया। सपा के विधायक ‘गवर्नर मैडम गो बैक, गो बैक’ के नारे लगाते रहे। वे राजमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा, मणिकर्णिका घाट पर हुई कार्रवाई, और अन्य मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे। हंगामे के बावजूद राज्यपाल ने अपना अभिभाषण पूरा किया। इसके बाद आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने के तुरंत बाद सदन को स्थगित कर दिया गया।
सपा का धरना और विरोध प्रदर्शन
बजट सत्र के पहले दिन ही समाजवादी पार्टी ने सदन के बाहर विरोध के स्वर तेज कर दिए। एमएलसी आशुतोष सिन्हा साइकिल पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे और हाथ में पोस्टर लिए थे। पोस्टर में लिखा था कि “राजमाता अहिल्याबाई का अपमान हिंदुस्तान नहीं सहेगा”, और मणिकर्णिका घाट पर कार्रवाई के खिलाफ भी उन्होंने विरोध जताया। आशुतोष सिन्हा ने कहा कि यह मुद्दा वे सड़क से लेकर सदन तक उठाएंगे।
कांग्रेस का बयान और बजट पर टिपण्णी
कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि सरकार बजट के नाम पर दिखावा कर रही है। उनका कहना था कि सिर्फ बजट का आकार बड़ा करने से प्रदेश का विकास नहीं होगा, बल्कि इसका सही और प्रभावी उपयोग होना चाहिए। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर कहा कि भारत रत्न की शोभा पहले से ही बड़ी है और किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।
सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन: हड़बड़ी में तैयारी
बजट सत्र को देखते हुए विधानसभा और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए। विधानसभा क्षेत्र को 10 सेक्टरों में बाँटा गया, जहां 1,000 पुलिसकर्मी, 6 कंपनी पीएसी और RRF की तैनाती की गई। यह कदम सदन में संभावित हंगामे और प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया था।
बजट सत्र का विस्तृत कार्यक्रम
- 9 फरवरी: सुबह 11 बजे सत्र की शुरुआत, दोपहर 12:30 बजे राज्यपाल का अभिभाषण।
- 10 फरवरी: वर्तमान और पूर्व सदस्यों के निधन पर शोक प्रस्ताव पारित।
- 11 फरवरी: वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश।
- 12-13 फरवरी: राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा।
- 16-18 फरवरी: बजट पर सामान्य चर्चा, जिसमें विधायक अपनी राय रखेंगे।
- 19 फरवरी: बजट की अनुदान मांगों पर विचार-विमर्श और मतदान।
- 20 फरवरी: बजट पर अंतिम चर्चा और मतदान, सत्र का समापन।
बजट की विशेषताएँ और चुनावी परिप्रेक्ष्य
बताया जा रहा है कि सरकार लगभग 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश कर सकती है, जो कि सपा सरकार के बजट से तीन गुना बड़ा है। चूंकि यह चुनावी वर्ष है, इसलिए सरकार विकास और लोकलुभावन योजनाओं का मिश्रण कर सकती है। इस सत्र के दौरान कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, युवा रोजगार, बुनियादी ढांचा और कल्याणकारी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सर्वदलीय बैठक: सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील
सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सभी दलों को सदन की गरिमापूर्ण कार्यवाही सुनिश्चित करने की अपील की। विपक्ष सरकार की नीतियों और जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाने के लिए तैयार है। इस सत्र में न केवल उत्तर प्रदेश की वित्तीय रूपरेखा तय होगी, बल्कि आगामी समय में राज्य के विकास की दिशा भी निर्धारित होगी। उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह बजट सत्र राजनीतिक दृष्टि से हंगामेदार और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। 11 फरवरी को पेश होने वाला बजट राज्य की प्रगति की नई कहानी लिखने की क्षमता रखता है। सभी की निगाहें इस पर हैं कि कैसे सरकार विकास, आर्थिक स्थिरता और चुनावी रणनीति का संतुलन साधती है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर