डेली24भारत डेस्क: जनकपुरी इलाके की जोगिंदर सिंह मार्ग पर शुक्रवार सुबह एक परिवार का खुशहाल जीवन अचानक काला पड़ गया। दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए 20 फुट गहरे गड्ढे में 25 वर्षीय युवक कमल गिर गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। कमल अपने जुड़वा भाई करण का आधा हिस्सा था और पूरे परिवार की उम्मीदें उसकी सफलता पर टिकी हुई थीं। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन और सिस्टम की गंभीर लापरवाही का परिणाम बताया जा रहा है।
कमल सुबह एंबियंस मॉल स्थित अपने कार्यालय से घर लौट रहा था, लेकिन रात 11:53 बजे हुई आखिरी बातचीत के बाद वह कभी घर नहीं पहुंचा। उसका भाई करण और परिवारजन रातभर उसकी तलाश करते रहे, इलाके और थानों का चक्कर काटा, लेकिन गड्ढे पर किसी तरह की चेतावनी या सुरक्षा व्यवस्था मौजूद नहीं थी। जब सुबह उजाला हुआ, तब पता चला कि कमल उसी गड्ढे में फंसा हुआ था, जिसमें उसका शव और मोटरसाइकिल मिली।
कमल मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले का रहने वाला था और हाल ही में बीए की पढ़ाई पूरी कर एक प्राइवेट बैंक में नौकरी कर रहा था। परिवार के लिए कमल सिर्फ एक बेटा नहीं था, बल्कि घर की उम्मीद, अपने भाई का सहारा और परिवार की खुशियों का स्रोत था। उसकी बाइक, जिसे उसने तीन साल पहले अपने जन्मदिन पर खरीदा था, अब वहीं गड्ढे में धंसी मिली।
इस घटना के बाद दिल्ली सरकार में हड़कंप मच गया। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने तुरंत तीन इंजीनियरों — असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर — को सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई, जो सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और साइनेज की कमी की समीक्षा करेगी। मंत्री आशीष सूद ने घटनास्थल का निरीक्षण कर परिवार को सांत्वना दी और कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस दर्दनाक घटना पर आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह हादसा नहीं बल्कि हत्या है। उन्होंने सरकार की लापरवाही और गैर-जिम्मेदार रवैये की आलोचना की और कहा कि आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
करण ने मीडिया को बताया, “कल रात 11:53 बजे मेरी भाई से आखिरी बात हुई। हम रातभर उसे ढूंढते रहे। हमने उसी गड्ढे के पास फ्लैशलाइट जलाकर भी देखा, लेकिन वहां कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं था। सुबह जब पता चला, वह वहीं दम तोड़ चुका था।”
यह घटना एक बार फिर सिस्टम में गंभीर खामियों और सुरक्षा के प्रति उदासीनता को उजागर करती है। परिवार के लिए यह अनमोल नुकसान न केवल मानसिक और भावनात्मक है, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों और भविष्य की योजनाओं को तहस-नहस कर गया है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर