डेली24 भारत डेस्क: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बार फिर चाइनीज मांझे की वजह से हुई दर्दनाक मौत के कारण सुर्खियों में है. हैदरगंज चौराहे से तालकटोरा मिल एरिया को जोड़ने वाले फ्लाईओवर पर बुधवार दोपहर एक स्कूटी सवार युवक की गर्दन चाइनीज मांझे से कट गई, जिससे उसकी मौके पर ही हालत गंभीर हो गई और बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई. इस हृदयविदारक घटना ने न सिर्फ एक परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मृतक की पहचान मो. शोएब (35) के रूप में हुई है, जो दुबग्गा स्थित सीते विहार कॉलोनी के निवासी थे. शोएब एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रजेंटेटिव के रूप में कार्यरत थे और रोज की तरह बुधवार दोपहर स्कूटी से मार्केट जा रहे थे. जैसे ही वह हैदरगंज से मिल एरिया की ओर जाने वाले फ्लाईओवर पर चढ़े, ढाल के पास अचानक पतंग का चाइनीज मांझा उनकी गर्दन में फंस गया. लोगों के अनुसार, मांझा इतना तेज और धारदार था कि शोएब को संभलने का मौका तक नहीं मिला. खिंचाव के साथ उनकी गर्दन कट गई और वह अनियंत्रित होकर स्कूटी से नीचे गिर पड़े.
लखनऊ: मोहम्मद शोएब की मौत के बाद सीएम योगी का बड़ा बयान-“यूपी में चाइनीज मांझे से होने वाली मौत को हत्या माना जाएगा”। प्रतिबंधित चाइनीज मांझे पर सख्त कार्रवाई के निर्देश।@UPGovt @myogiadityanath #Lucknow #ChineseManja pic.twitter.com/qvBxZOFslD
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घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी गई. बाजारखाला थाना पुलिस ने तुरंत शोएब को ट्रॉमा सेंटर भिजवाया और उनके परिजनों को सूचित किया. हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. शोएब अपने पीछे पत्नी फौजिया, सात साल की बेटी बुशरा, दो साल की इकरा और मां आबिदा बानो को छोड़ गए हैं. परिवार के लिए यह नुकसान अपूरणीय है, क्योंकि शोएब ही घर के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे. उनके पिता का कई साल पहले ही निधन हो चुका है.
इस दर्दनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने प्रदेश में चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को अवैध बिक्री और इस्तेमाल के खिलाफ विशेष छापेमारी अभियान चलाने को कहा है. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया की चाइनीज मांझे से होने वाली मौतों को हत्या की श्रेणी में माना जाएगा और पूरे प्रदेश में की गई कार्रवाई की उच्च स्तर पर समीक्षा होगी.
लखनऊ: थाना वजीरगंज क्षेत्र में चला चेकिंग अभियान। चौकी हाता, गोलागंज और बारूदखाना क्षेत्र में जांच। बुलंद बाग इलाके में पतंग और मांझा बेचने वालों पर नजर। अवैध रूप से बिक रहा प्रतिबंधित मांझा जब्त। दुकानदारों को मौके पर सख्त चेतावनी। भविष्य में अवैध मांझा न बेचने के निर्देश।… pic.twitter.com/BFxzCJbJ6T
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गौरतलब है कि चाइनीज मांझा, जिसे सिंथेटिक या नायलॉन मांझा भी कहा जाता है, पर्यावरण और जीव-जंतुओं के लिए बेहद खतरनाक माना गया है. इस पर पहले ही अदालत और राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा चुका है. इसके बावजूद चोरी-छिपे इसकी बिक्री और इस्तेमाल लगातार जारी है, जो पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है. नियमों के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत दोषियों को पांच साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. इसके अलावा बीएनएस की धारा 188, और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 के तहत भी कड़ी सजा का प्रावधान है.
लखनऊ की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि त्योहारों और शौक के नाम पर की जाने वाली लापरवाही कितनी जानलेवा हो सकती है. कानून तभी प्रभावी होगा जब प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिक भी जिम्मेदारी समझें. वरना हर बार किसी शोएब की जिंदगी यूं ही एक अदृश्य, लेकिन बेहद घातक धागे से कटती रहेगी और समाज सिर्फ अफसोस करता रह जाएगा.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर