डेली24भारत डेस्क: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों की मान्यता और उनके संचालन के लिए भूमि संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पुराने प्रावधानों को समाप्त कर बोर्ड ने नए नियम लागू किए हैं, जिसमें विभिन्न शहरों और क्षेत्रों के अनुसार न्यूनतम भूमि सीमा निर्धारित की गई है। यह बदलाव सुनिश्चित करता है कि छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ खेल-कूद और अन्य गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो।
खेल का मैदान अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार, सभी CBSE स्कूलों में कम से कम 2000 वर्ग मीटर का खेल मैदान होना अनिवार्य है। यदि किसी स्कूल की कुल भूमि 6000 वर्ग मीटर से कम है, तो उसे यह सुविधा अपने परिसर में उपलब्ध करानी होगी। यदि ऐसा करना संभव नहीं है, तो स्कूल को नजदीकी स्कूल, कॉलेज, स्टेडियम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स या सार्वजनिक पार्क के साथ कम से कम 15 वर्षों का लिखित समझौता करना होगा। इस समझौते के तहत छात्र खेल गतिविधियों के लिए आसानी से और सुरक्षित रूप से उस स्थान का उपयोग कर सकेंगे।
इस खेल सुविधा का स्कूल से अधिकतम 200 मीटर की दूरी पर होना अनिवार्य है और बच्चों को किसी व्यस्त मुख्य सड़क या राष्ट्रीय राजमार्ग पार नहीं करना चाहिए। यह कदम छात्रों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
स्कूल बिल्डिंग की ऊंचाई और निर्माण
स्कूल भवन की ऊंचाई और कवर एरिया संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के भवन निर्माण नियमों (Building Bylaws) के अनुसार होगा। इसका मतलब है कि हर राज्य के नियमों के अनुसार भवन निर्माण में सुरक्षा, वेंटिलेशन और अन्य संरचनात्मक मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग भूमि मानक
CBSE ने शहरों और क्षेत्रों की भौगोलिक और जनसंख्या परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग भूमि मानक तय किए हैं।
- मेट्रो शहर और राज्य की राजधानी: दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता जैसे महानगरों में सेकेंडरी स्कूल के लिए न्यूनतम 1600 वर्ग मीटर भूमि और सीनियर सेकेंडरी स्कूल के लिए 2400-3200 वर्ग मीटर भूमि का प्रावधान करना अनिवार्य है।
- पहाड़ी और कठिन भूभाग वाले क्षेत्र: अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप जैसे क्षेत्रों में विशेष छूट दी गई है, ताकि वहां के भौगोलिक और भौतिक कठिनाइयों के बावजूद स्कूल संचालन संभव हो सके।
पुराने स्कूलों पर लागू नियम
CBSE ने स्पष्ट किया है कि जो स्कूल पहले से बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं, उन पर पुराने नियम ही लागू होंगे। नए प्रावधान केवल नए मान्यता प्राप्त होने वाले स्कूलों और नए विस्तार पर लागू होंगे।
इस बदलाव का उद्देश्य स्कूलों में पर्याप्त खेल और शैक्षिक सुविधाओं को सुनिश्चित करना, छात्रों की सुरक्षा बढ़ाना और शिक्षा के साथ उनके सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर