Daily 24 भारत डेस्क: दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में शुमार Harvard University को बड़ा झटका लगा है। CWTS लीडेन रैंकिंग 2025 (साइंस कैटेगरी) में हार्वर्ड अब पहले या दूसरे स्थान पर नहीं, बल्कि तीसरे नंबर पर खिसक गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार पहला और दूसरा स्थान चीन की यूनिवर्सिटीज—झेजियांग यूनिवर्सिटी और शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी ने अपने नाम किया है। इतना ही नहीं, टॉप-10 में तीसरे स्थान को छोड़कर बाकी लगभग सभी पोजिशन चीनी यूनिवर्सिटीज के पास हैं। यह साफ संकेत है कि ग्लोबल एजुकेशन और साइंटिफिक रिसर्च का केंद्र तेजी से अमेरिका से चीन की ओर शिफ्ट हो रहा है।
क्या है CWTS लीडेन रैंकिंग?
CWTS लीडेन रैंकिंग एक प्रतिष्ठित ग्लोबल ऑनलाइन रैंकिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी स्टडीजतैयार करता है। यह रैंकिंग 1,500 से ज्यादा प्रमुख यूनिवर्सिटीज के साइंटिफिक रिसर्च परफॉर्मेंस को आंकती है।
इस रैंकिंग की खासियत यह है कि यह पूरी तरह डेटा-ड्रिवन होती है और वेब ऑफ साइंस डेटाबेस पर आधारित रहती है।रिसर्च आउटपुट, क्वालिटी और इम्पैक्ट को इसमें सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है।इसी वजह से दुनियाभर की सरकारें, एजुकेशन एक्सपर्ट्स और स्टूडेंट्स इसे बेहद गंभीरता से लेते हैं।
दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी अपडेट। चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी बनी नंबर 1। शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी रही नंबर 2। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पीछे रह गई। CWTS लीडेन रैंकिंग 2025 (साइंस कैटेगरी) ने जारी की रैंकिंग्स।#HarvardUniversity #ZhejiangUniversity #ShanghaiJiaoTong pic.twitter.com/cHJBR4brkQ
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) January 17, 2026
जब अमेरिका का था एकतरफा दबदबा
CWTS लीडेन रैंकिंग की शुरुआत 2006-2009 के डेटा से हुई थी।
उस दौर में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी नंबर-1,
यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो नंबर-2
और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन नंबर-3 पर थी।
टॉप-10 में ज्यादातर यूनिवर्सिटीज अमेरिका की थीं। यह वह दौर था जब ग्लोबल रिसर्च पर अमेरिका का एकतरफा दबदबा माना जाता था। आज तस्वीर बिल्कुल उलट है। 2006-2009 के टॉप-10 में शामिल अमेरिका की 6 बड़ी यूनिवर्सिटीज अब टॉप-15 में भी नहीं हैं।
इनमें शामिल हैं—
यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन
UCLA
जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी
यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी
2019-2022 के दौरान पहली बार झेजियांग यूनिवर्सिटी ने हार्वर्ड को पीछे छोड़ा। 2020-2023 में हार्वर्ड सीधे तीसरे स्थान पर फिसल गई, जबकि 2018-2021 तक वह एक दशक से ज्यादा समय तक टॉप पर बनी हुई थी।
चीन की बढ़त की वजह क्या?
CWTS लीडेन रैंकिंग 2025 साफ तौर पर दिखाती है कि चीन ने-
रिसर्च और डेवलपमेंट में भारी निवेश किया
साइंस और टेक्नोलॉजी को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया
इंटरनेशनल कोलैबोरेशन को मजबूत किया
यही वजह है कि आज ग्लोबल साइंस रैंकिंग पर चीन का वर्चस्व साफ नजर आ रहा है। भारत के लिए राहत की बात यह है कि कुछ संस्थानों ने मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। VIT भारत में नंबर-1 रहा है।
इसके बाद-
IIT खड़गपुर
IIT दिल्ली
IIT बॉम्बे
IIT मद्रास
हालांकि भारत अभी टॉप ग्लोबल पोजिशन से दूर है, लेकिन रिसर्च बेस लगातार मजबूत हो रहा है, जो आने वाले वर्षों में बेहतर रैंकिंग की उम्मीद जगाता है।