डेली24 भारत डेस्क: प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़े का विस्तार माघ मेला क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहा है. पिछले दिनों अखाड़े में पहली बार पट्टाभिषेक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें 11 संतों को पद और जिम्मेदारी दी गई. इनमें 10 संतों को महामंडलेश्वर और एक को महंत बनाया गया. इस विशेष अवसर पर पुरुष और महिलाओं का संतुलित प्रतिनिधित्व देखा गया, जिसमें एक पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं. खास बात यह है कि देश की पहली किन्नर अधिवक्ता को भी महामंडलेश्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई.
अखाड़े में पट्टाभिषेक से पहले सभी पारंपरिक मान्यताओं और नियमों का पालन किया गया, जो 13 प्राचीन अखाड़ों में अनिवार्य रूप से निभाए जाते हैं. पांच गुरुओं द्वारा दीक्षा प्रक्रिया संपन्न कराई गई. एक गुरु ने लंगोटी, दूसरी ने कंठी, एक ने चोटी काटी, और एक ने भस्म दी. सभी संतों ने पहले संगम में अपने पिंड का दान किया और नियमों के अनुसार गंगा स्नान किया. इसके बाद आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि ‘टीना मां’ ने सभी को गुरुमंत्र देकर आध्यात्मिक दिशा प्रदान की.
संतों का विवरण और पदस्थापन
पट्टाभिषेक में जिन संतों को पद दिया गया, उनमें प्रमुख हैं:
1 . दिल्ली से पूनम मां
2. देहरादून से नीतेश शंकर नंद गिरि
3. कोलकाता से अभिरूपा रंजीता (देश की पहली महिला किन्नर अधिवक्ता)
4. दिल्ली से पवित्रानंद गिरि
5. हरिद्वार किन्नर धाम से तारा
6. पंजाब से सोनम नंद गिरि
7. महाराष्ट्र से उमा पुजारी, ज्योति स्वामी, श्रीगायत्री
8. प्रयागराज से संजना कौशल्यानंद गिरि
इनमें से नीतेश पुरुष हैं, जबकि पवित्रा और तारा महिलाएं हैं. प्रयागराज की रानी कौशल्यानंद गिरि को महंत बनाया गया. आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि ने बताया कि अखाड़े का उद्देश्य समाज के हर वर्ग और समुदाय को जोड़ना है. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में कश्मीरी पंडितों और दक्षिण भारत के लोगों को भी संत बनाया जाएगा.
रील मत बनाओ, सनातन को बढ़ाओ
किन्नर अखाड़े में शुक्रवार को सात महामंडलेश्वर, छह श्रीमहंत, 11 महंत और 21 कंठी चेला बनाए गए. अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने सभी को गुरु मंत्र देकर दीक्षा दी. उन्होंने इस दौरान सभी से कहा की रील मत बनाओ, सनातन धर्म को आगे बढ़ाओ. आचार्य ने सभी को आने वाले कुम्भ मेलों की तैयारियों में जुटने के लिए भी प्रेरित किया.
किन्नर अखाड़ा के आचार्य वैष्णव अखाड़ा के अध्यक्ष पद की घोषणा भी की गई. उड़ीसा की महामंडलेश्वर स्वामी देवांशी को अध्यक्ष नियुक्त किया गया. इसके अतिरिक्त, अन्य महामंडलेश्वर बनाए गए:
- उत्तर प्रदेश, प्रतापगढ़ की पारोनंद गिरि
- महाराष्ट्र की नेहानंद गिरि
- ओडीसा की देवांशी नंद गिरि (रक्षा नंद गिरि)
- रांची की अमरजीत नंद गिरि
- दिल्ली की शालूनंद गिरि
- जबलपुर की साक्षीनंद गिरि
साथ ही 21 लोगों को कंठी चेला और 11 को महंत के पद पर नियुक्त किया गया. प्रयागराज के इस सनातनी किन्नर अखाड़े के विस्तार और पट्टाभिषेक से यह स्पष्ट हो गया है कि किन्नर समाज धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है. यह पहल न केवल सामाजिक समावेशिता का प्रतीक है, बल्कि धार्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी में जीवित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है. आने वाले समय में अखाड़ा और इसके संत समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए तैयार हैं और माघ मेले और आगामी कुंभ मेलों में अपनी उपस्थिति से धर्म और संस्कृति का संदेश फैलाएंगे.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर