Daily 24 भारत डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भले ही आधिकारिक तौर पर नोबेल शांति पुरस्कार न मिला हो, लेकिन अब वे खुद को नोबेल विजेता मान रहे हैं. वजह है वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो, जिन्होंने अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल ट्रंप को सौंप दिया है. सवाल ये है कि क्या कोई नोबेल विजेता अपना पुरस्कार किसी और को दे सकता है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से खुद को ‘पीसमेकर’ बताते रहे हैं. पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से पहले ट्रंप ने कई बार दावा किया था कि उन्होंने सात युद्ध रुकवाए हैं और इसी वजह से उन्हें नोबेल मिलना चाहिए लेकिन 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप को नहीं, बल्कि वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को दिया गया. इस फैसले से ट्रंप खासे नाराज़ हो गए थे. तब व्हाइट हाउस ने कहा था कि नोबेल समिति ने शांति के बजाय राजनीति को प्राथमिकता दी है.
अब इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब मचाडो ने व्हाइट हाउस जाकर अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल ट्रंप को सौंप दिया. मुलाकात के बाद ट्रंप ने मचाडो की जमकर तारीफ की. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मचाडो एक “अद्भुत महिला” हैं और उनका यह कदम आपसी सम्मान का खूबसूरत संकेत है. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप इस मेडल को अपने पास रखने वाले हैं.मारिया कोरीना मचाडो वेनेजुएला में निकोलस मादुरो सरकार के दौरान लंबे समय तक दमन का शिकार रही हैं. गिरफ्तारी के डर से वे करीब 11 महीने तक छिपकर रहीं. नोबेल पुरस्कार समारोह में भी उनकी जगह उनकी बेटी ने नॉर्वे जाकर पुरस्कार प्राप्त किया था.
हालांकि, मादुरो की गिरफ्तारी के बाद मचाडो को उम्मीद थी कि ट्रंप उन्हें वेनेजुएला की सत्ता में आगे बढ़ाएंगे. लेकिन ट्रंप ने मादुरो की डिप्टी डेल्सी रोड्रिगेज को समर्थन दे दिया, जिससे मचाडो की राजनीतिक स्थिति कमजोर मानी जा रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रंप को नोबेल मेडल सौंपना एक राजनीतिक संदेश भी हो सकता है.
नोबेल शांति पुरस्कार की वेबसाइट के मुताबिक:
- नोबेल पुरस्कार न तो वापस लिया जा सकता है
- न किसी और को ट्रांसफर किया जा सकता है
- और न ही साझा किया जा सकता है
नोबेल फाउंडेशन के नियम साफ कहते हैं कि पुरस्कार देने के फैसले के खिलाफ कोई अपील संभव नहीं है और एक बार दिया गया पुरस्कार हमेशा के लिए अंतिम होता है. यानी मारिया कोरीना मचाडो भले ही अपना नोबेल मेडल ट्रंप को सौंप दें, लेकिन कानूनी और औपचारिक तौर पर नोबेल शांति पुरस्कार अब भी उन्हीं के नाम ही रहेगा. ट्रंप के पास सिर्फ मेडल है, नोबेल का दर्जा नहीं.