Daily 24 भारत डेस्क: जयपुर में आयोजित आर्मी डे परेड 2026 के बाद सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना की रणनीति और भविष्य की तैयारियों को लेकर अहम बयान दिए। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना सिर्फ मौजूदा चुनौतियों पर नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति तैयार कर रही है। आत्मनिर्भरता, आधुनिक तकनीक और बदलते युद्ध स्वरूप पर सेना का फोकस लगातार बढ़ रहा है।
आर्मी चीफ ने कहा कि परेड में जनता की भारी मौजूदगी यह दर्शाती है कि सेना और नागरिकों के बीच गहरा और मजबूत रिश्ता है। उन्होंने बताया कि इस बार की परेड में परंपरा और परिवर्तन का अनूठा संगम देखने को मिला। साथ ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन भी किया गया, जो सेना के साहस और बलिदान का प्रतीक है।
आर्मी डे परेड के बाद सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा- ‘इंडियन आर्मी वर्तमान नहीं, भविष्य की रणनीति पर कर रहा काम’#ArmyDayParade #UpendraDwivedi #IndianArmy pic.twitter.com/xieUfVH2BA
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) January 16, 2026
जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना वर्तमान की नहीं, बल्कि भविष्य की जंग को ध्यान में रखकर खुद को तैयार कर रही है। सैनिकों को अधिक सक्षम बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। ड्रोन तकनीक, विशेष बटालियन और तकनीकी रूप से सशक्त नई इकाइयों को सेना में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मौजूदा ड्रोन 800 किलोमीटर तक मारक क्षमता रखते हैं, जो भविष्य के युद्ध में अहम भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने राजस्थान के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सेना में सबसे अधिक बहादुर सैनिक इसी राज्य से आते हैं, जिन्होंने हर युद्ध में इतिहास रचा है। भारतीय सेना परंपराओं का सम्मान करते हुए बदलाव और आधुनिकता को भी समान रूप से महत्व देती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए आर्मी चीफ ने कहा कि आज की लड़ाइयों की अवधि का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। कोई युद्ध चार दिन में खत्म हो सकता है, तो कोई चार साल तक भी चल सकता है। ऐसे में लंबे युद्धों के लिए स्वदेशी हथियार और उपकरण बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि यदि विदेशी तकनीक की जरूरत पड़ी, तो कंपनियों को भारत बुलाकर यहीं उत्पादन कराया जाएगा।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जोर देते हुए कहा कि भारतीय सेना आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके लिए अनुसंधान और विकास पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि सेना हर चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार और सक्षम बन सके।