डेली24 भारत डेस्क: IPL का मंच सिर्फ क्रिकेट का उत्सव नहीं, बल्कि देश की भावनाओं, विचारधाराओं और बहसों का भी आईना रहा है. हर साल यहां चौकों–छक्कों के साथ-साथ फैसलों पर चर्चा होती है, लेकिन इस बार टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही विवाद ने सुर्खियां बटोर ली हैं. वजह बना है कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ मुस्ताफ़िज़ुर रहमान को अपनी टीम में शामिल किया जाना. इस एक खिलाड़ी चयन ने खेल को राजनीति, धर्म और अंतरराष्ट्रीय हालात से जोड़ते हुए एक बड़े विमर्श को जन्म दे दिया है.
विवाद की शुरुआत कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के बयान से मानी जा रही है. उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचारों का ज़िक्र करते हुए कहा कि ऐसे हालात में किसी बांग्लादेशी खिलाड़ी को आईपीएल टीम में रखना गलत संदेश देता है. उनका तर्क था कि खेल सिर्फ खेल नहीं रहता, बल्कि कभी-कभी वह सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ जाता है. देवकीनंदन ठाकुर ने यहां तक कहा कि यदि इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो केकेआर के बहिष्कार की बात भी उठ सकती है.
भाजपा नेता संगीत सोम का अभिनेता शाहरुख खान पर विवादित बयान। कहा- बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं, फिर भी आईपीएल में वहां के खिलाड़ी खरीदे जा रहे हैं। शाहरुख़ खान देशद्रोही हैं… रहमान एयरपोर्ट तक पार नहीं कर पाएगा।@BJP4India @iamsrk @sangeetsom_bjp #ShahRukhKhan… pic.twitter.com/nczMIPZH1n
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इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज़ हो गई. कुछ लोग इसे देश और धर्म से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं, जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि क्रिकेट को राजनीति और धार्मिक टकराव से दूर रखा जाना चाहिए. उनके अनुसार, खिलाड़ी किसी देश की नीतियों या घटनाओं का प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि वह सिर्फ खेल का हिस्सा होता है. मामला यहीं नहीं रुका…नागपुर पहुंचे स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए शाहरुख़ खान पर सवाल उठाए. उनके तीखे शब्दों ने विवाद को और हवा दी, जिससे यह चर्चा क्रिकेट के मैदान से निकलकर सार्वजनिक और वैचारिक मंचों तक पहुंच गई. इसी क्रम में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि बांग्लादेश में जो घटनाएं सामने आ रही हैं, वे हिंदुत्व के खिलाफ हैं और वहां के खिलाड़ियों को भी इस पर अपनी आवाज़ रखनी चाहिए. उन्होंने क्रिकेट बोर्ड और संबंधित संस्थाओं से संवेदनशीलता दिखाने की अपील की.
IPL से पहले मचा बवाल! …शाहरुख को बताया ‘गद्दार’! @iamsrk @DN_Thakur_Ji #ShahRukhKhan #IPLControversy #MustafizurRahman pic.twitter.com/ys1RFZttG9
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अयोध्या के सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी से जुड़े संत देवेशाचार्य महाराज ने भी देवकीनंदन ठाकुर के बयान का समर्थन किया. उनका कहना था कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की खबरें चिंताजनक हैं और ऐसे माहौल में वहां के खिलाड़ी का भारत में खेलना कई सवाल खड़े करता है. उन्होंने शाहरुख़ खान से भी यह सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी पीड़ित हिंदुओं के समर्थन में सार्वजनिक रूप से आवाज़ उठाई.
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई. बीजेपी नेता संगीत सोम ने शाहरुख खान और केकेआर के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे आरोपों के बीच बांग्लादेशी खिलाड़ी को करोड़ों में खरीदना गलत है. उनके बयान पर विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई और इसे अनावश्यक उकसावे वाला बताया. विवाद तब और गंभीर हो गया जब अखिल भारतीय हिंदू महासभा की एक जिला पदाधिकारी ने शाहरुख खान के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और हिंसक बयान दिया गया. इस बयान की चौतरफा निंदा हुई और कई लोगों ने इसे कानून और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ बताया. आलोचकों का कहना है कि असहमति जताने का यह तरीका लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है.
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच शाहरुख़ खान के समर्थन में भी आवाज़ें उठीं। बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रिज़वी बरेलवी ने शाहरुख़ का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें गद्दार या आतंकी कहना न सिर्फ गलत बल्कि शर्मनाक है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बांग्लादेश भारत का मित्र देश है और खेल को नफरत की राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए. कुल मिलाकर, आईपीएल शुरू होने से पहले ही बयानबाज़ी का मैच अपने चरम पर है। एक तरफ धार्मिक और राजनीतिक संगठनों की कड़ी प्रतिक्रियाएं हैं, तो दूसरी तरफ खेल को राजनीति से अलग रखने की अपील. अब सबकी निगाहें केकेआर और बीसीसीआई पर टिकी हैं कि वे इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं. फिलहाल इतना तय है कि इस मुद्दे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है की क्या खेल को उसकी सीमाओं में रहने दिया जाएगा, या वह हर बार सामाजिक और राजनीतिक खींचतान का मैदान बनता रहेगा.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर