Daily 24 भारत डेस्क: राज्यसभा में सोमवार को एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला, राज्यसभा सचिवालय ने आम आदमी पार्टी के पूर्व सांसद राघव चड्ढा के साथ सभी 7 बागी सांसदों के बीजेपी में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी. इस संबंध में सुबह अधिसूचना जारी की गई, जिसके बाद राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हो गया है. इसे संसद के समीकरणों में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
यह घटनाक्रम उस समय तेज हुआ जब शुक्रवार को राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया था कि राज्यसभा में ‘आप’ के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने भाजपा में विलय का फैसला किया है. इसके बाद उन्होंने राज्यसभा के सभापति को औपचारिक पत्र सौंपकर संवैधानिक प्रावधानों के तहत विलय की मंजूरी मांगी थी, जिसे अब संसद द्वारा स्वीकार कर लिया गया है. यह कदम दल-बदल कानून के तहत उस स्थिति में संभव होता है जब किसी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ विलय का निर्णय लेते हैं.
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि सात सांसदों ने विलय से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं और इसे व्यक्तिगत रूप से सभापति को सौंपा गया है. उन्होंने दावा किया कि उनके साथ स्वाति मालीवाल और हरभजन सिंह भी इस फैसले में शामिल हैं. इसके अलावा बलबीर सिंह सीचेवाल और विक्रमजीत सिंह साहनी जैसे अन्य सांसदों के भी भाजपा में शामिल होने की चर्चा तेज है, जिससे आने वाले दिनों में समीकरण और बदल सकते हैं.
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नबीन ने भी इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक पार्टी की सदस्यता ले चुके हैं, जबकि अन्य सांसद जल्द ही औपचारिक रूप से शामिल होंगे. इस राजनीतिक बदलाव को बीजेपी के लिए रणनीतिक बढ़त और आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
संख्याबल की दृष्टि से यह बदलाव बेहद अहम है. पहले राज्यसभा में बीजेपी के 106 सदस्य थे, जो अब बढ़कर 113 हो गए हैं, जिससे पार्टी की विधायी क्षमता और प्रभाव में वृद्धि होगी. वहीं आम आदमी पार्टी की ताकत घटकर महज 3 सांसदों तक सीमित रह गई है. दूसरी ओर कांग्रेस के पास 29 सांसद हैं और वह अभी भी विपक्ष की प्रमुख ताकत बनी हुई है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर अन्य राज्यों की राजनीति पर भी पड़ेगा. खासतौर पर पंजाब में, जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है, वहां 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर यह बड़ा संकेत माना जा रहा है. पार्टी के भीतर असंतोष और टूट की खबरें आने से संगठनात्मक मजबूती पर सवाल उठ सकते हैं.
कुल मिलाकर, राज्यसभा में यह विलय भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. जहां एक तरफ बीजेपी अपने संख्याबल को मजबूत कर रही है, वहीं आम आदमी पार्टी के सामने अपनी राजनीतिक जमीन और संगठन को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बदलाव का राष्ट्रीय और राज्य स्तर की राजनीति पर क्या असर पड़ता है.