Daily 24 भारत डेस्क: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि इस बार सोमवार, 27 अक्टूबर 2025 को है। यह पर्व भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को समर्पित है। दिवाली के बाद आने वाला यह व्रत बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि आती है, लेकिन कार्तिक मास की षष्ठी खास होती है, क्योंकि इसी दिन भगवान स्कंद ने असुर सुरपद्मन का वध करके धर्म की रक्षा की थी। इस व्रत से शत्रु नाश, भय से मुक्ति, रोगों से राहत और साहस की प्राप्ति होती है।
स्कंद षष्ठी 2025 पूजा मुहूर्त और शुभ योग
द्रिक पंचांग के अनुसार:
- तिथि: सोमवार, 27 अक्टूबर 2025
- सूर्य राशि: तुला
- चंद्र राशि: धनु
- अभिजीत मुहूर्त: 11:42 AM – 12:27 PM
- राहुकाल: 7:53 AM – 9:17 AM
- रवि योग: 1:27 PM से अगले दिन सुबह 6:30 AM तक
अन्य शुभ समय:
- ब्रह्म मुहूर्त – 04:47 AM से 05:38 AM
- विजय मुहूर्त – 01:56 PM से 02:41 PM
- गोधूलि मुहूर्त – 05:40 PM से 06:06 PM
इस दिन रवि योग, रूचक राजयोग और भास्कर योग भी बन रहे हैं, जो इसे और अधिक शुभ बनाते हैं।
स्कंद षष्ठी का महत्व
स्कंद पुराण के अनुसार, भगवान कार्तिकेय ने इस दिन राक्षस तारकासुर का वध किया था। इस जीत की खुशी में देवताओं ने स्कंद षष्ठी उत्सव मनाया था।
दक्षिण भारत में यह पर्व बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं संतान की इच्छा रखती हैं, उन्हें इस दिन स्कंद षष्ठी का व्रत करना चाहिए। इस व्रत से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
स्कंद षष्ठी पूजा विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- मंदिर या घर के पूजा स्थान को साफ करें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा रखें।
- सबसे पहले भगवान गणेश और नवग्रहों की पूजा करें।
- फिर व्रत का संकल्प लेकर भगवान कार्तिकेय को वस्त्र, इत्र, चंपा के फूल, आभूषण, दीप, धूप और प्रसाद अर्पित करें।
- भगवान कार्तिकेय का प्रिय फूल चंपा है, इसलिए इस दिन को चंपा षष्ठी भी कहा जाता है।
- पूजा के बाद भगवान की आरती करें, तीन बार परिक्रमा करें और
“ॐ स्कंद शिवाय नमः” मंत्र का जाप करें। - अंत में आरती कर प्रसाद ग्रहण करें और आशीर्वाद लें।