डेली24भारत डेस्क: दुनियाभर में एक बार फिर COVID-19 के नए सब-वेरिएंट BA.3.2, जिसे वैज्ञानिकों ने अनौपचारिक तौर पर ‘सिकाडा’ (Cicada) नाम दिया है, ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। यह वेरिएंट ओमिक्रॉन परिवार का हिस्सा है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका लंबे समय तक “छिपा रहना” और अचानक तेज़ी से सामने आना है। फिलहाल इसे विश्व स्वास्थ्य एजेंसियों ने Variant Under Monitoring श्रेणी में रखा है, यानी इस पर लगातार नजर रखी जा रही है, हालांकि अभी इसे अत्यधिक खतरनाक घोषित नहीं किया गया है।
नीचे इस वेरिएंट के बारे में विस्तार से समझिए—
क्यों खास है ‘सिकाडा’ वेरिएंट?
BA.3.2 को ‘सिकाडा’ नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यह ठीक उसी कीड़े की तरह व्यवहार करता दिख रहा है, जो वर्षों तक जमीन के अंदर छिपा रहता है और अचानक बड़ी संख्या में बाहर निकल आता है। इसी तरह यह वेरिएंट पहली बार नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में पहचाना गया, फिर कुछ समय तक शांत रहा और बाद में कई देशों में तेजी से सामने आने लगा।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी “साइलेंट सर्कुलेशन” यानी बिना ज्यादा ध्यान में आए फैलने की क्षमता इसे खास बनाती है।
म्यूटेशन का अंबार: क्यों बढ़ी चिंता?
इस वेरिएंट की सबसे बड़ी चिंता इसकी जेनेटिक संरचना है:
- इसके स्पाइक प्रोटीन में लगभग 70–75 म्यूटेशन पाए गए हैं।
- यह संख्या कई पुराने ओमिक्रॉन सब-वेरिएंट्स से ज्यादा है।
- स्पाइक प्रोटीन वही हिस्सा होता है जिससे वायरस शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करता है।
- अधिक म्यूटेशन का मतलब यह हो सकता है कि वायरस पहले से बनी इम्युनिटी या वैक्सीन सुरक्षा से कुछ हद तक बच निकलने की क्षमता रखता हो।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि अभी तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि यह पहले के वेरिएंट्स से ज्यादा घातक है।
कितने देशों में फैल चुका है?
उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार:
- यह वेरिएंट अब तक 23 देशों में पाया जा चुका है।
- अमेरिका के कई राज्यों में इसकी पुष्टि वेस्टवॉटर निगरानी और यात्रियों के सैंपल से हुई है।
- यूरोप के कुछ देशों—जैसे जर्मनी, डेनमार्क और नीदरलैंड—में इसके मामलों का प्रतिशत बढ़ता देखा गया है।
यानी यह वेरिएंट अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन वैज्ञानिक इसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
क्या यह ज्यादा खतरनाक है?
अब तक के शोध के अनुसार:
- यह पहले के ओमिक्रॉन वेरिएंट्स जैसा ही व्यवहार करता दिख रहा है।
- इसके ज्यादा गंभीर होने के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं।
- वैक्सीन अभी भी गंभीर बीमारी से बचाने में प्रभावी मानी जा रही है।
लेकिन बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग सावधानी रखें—ऐसी सलाह दी जा रही है।
‘सिकाडा’ वेरिएंट के प्रमुख लक्षण
इसके लक्षण काफी हद तक ओमिक्रॉन जैसे ही हैं, लेकिन कुछ मामलों में ज्यादा तीव्र गले की समस्या देखी गई है:
सामान्य लक्षण:
- गले में तेज खराश
- सूखी खांसी
- नाक बंद या बहना
- तेज थकान
- सिरदर्द
- हल्का से मध्यम बुखार
अन्य संभावित लक्षण:
- शरीर दर्द
- ठंड लगना
- सांस लेने में हल्की परेशानी
- स्वाद या गंध में कमी (कम मामलों में)
- पेट से जुड़ी समस्या—जैसे उल्टी, जी मिचलाना या दस्त
विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में यह संक्रमण हल्का भी हो सकता है और कुछ लोगों में बिना लक्षण के भी रह सकता है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ अभी भी वही सामान्य सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं:
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें
- हाथों की साफ-सफाई रखें
- बूस्टर डोज (यदि उपलब्ध हो) लगवाएं
- लक्षण दिखने पर तुरंत टेस्ट कराएं
- बुजुर्गों और बीमार लोगों के संपर्क में सावधानी रखें
क्या भारत में चिंता की जरूरत है?
फिलहाल यह वेरिएंट निगरानी की श्रेणी में है, चिंता की नहीं। लेकिन इसकी उच्च म्यूटेशन क्षमता को देखते हुए स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हैं। इसलिए लापरवाही नहीं, बल्कि जागरूकता सबसे जरूरी है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर