डेली24 भारत डेस्क: Hormuz जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है. ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने और अमेरिका-इजरायल से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक व्यापार दोनों को हिला कर रख दिया है. दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है, ऐसे में यह कदम सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक असर वाला माना जा रहा है.
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने “होर्मुज प्रबंधन योजना” को मंजूरी दे दी है. सरकारी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग के मुताबिक इस योजना में जहाजों से टोल वसूली, सुरक्षा इंतजाम, पर्यावरण संरक्षण और वित्तीय व्यवस्था को शामिल किया गया है. खास बात यह है कि टोल भुगतान ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ में होगा, जिससे ईरान अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.
इस योजना के तहत अमेरिका और इजरायल के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने पर पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है. इसके साथ ही उन देशों के जहाजों को भी रोकने का फैसला लिया गया है, जो ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का समर्थन करते हैं. यह कदम सीधे तौर पर पश्चिमी देशों के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है. ईरान ने इस योजना को लागू करने के लिए ओमान के साथ सहयोग का ढांचा भी तैयार किया है, क्योंकि यह जलडमरूमध्य दोनों देशों के बीच स्थित है. इससे यह स्पष्ट होता है कि ईरान इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय वैधता देने की दिशा में भी काम कर रहा है.
ट्रंप का दुनिया को संदेश- होर्मुज से जाकर खुद तेल लें, या अमेरिका से खरीदें#DonaldTrump #StraitofHormuz #IranWar pic.twitter.com/n91sWlhTdi
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) March 31, 2026
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच तनाव चरम पर है. 28 फरवरी से जारी संघर्ष के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. ईरान पहले ही कई बार इस मार्ग को बाधित कर चुका है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टोल व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो वैश्विक व्यापार की लागत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है. तेल की कीमतों में उछाल पहले ही देखा जा रहा है और आने वाले समय में यह और बढ़ सकता है. भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जहां ईंधन की कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य की कुल लंबाई लगभग 161 किलोमीटर है और यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है. पश्चिम एशिया के प्रमुख तेल उत्पादक देश जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई इसी रास्ते के जरिए अपना तेल निर्यात करते हैं. ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. अमेरिका ने पहले ही इस मार्ग को खुला रखने के लिए सख्त चेतावनी दी है, लेकिन ईरान फिलहाल अपने रुख पर कायम नजर आ रहा है. अगर हालात नहीं सुधरे, तो यह टकराव और गंभीर रूप ले सकता है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है.
ईरान का यह फैसला सिर्फ एक आर्थिक कदम नहीं बल्कि एक रणनीतिक और राजनीतिक संदेश भी है. होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर बढ़ती तनातनी आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा तय कर सकती है. दुनिया की नजरें अब इस क्षेत्र पर टिकी हैं, क्योंकि यहां की हर हलचल का असर सीधे आम आदमी की जेब तक पहुंच सकता है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर