Daily 24 भारत डेस्क: उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक किडनी-लिवर रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और DCP वेस्ट की क्राइम ब्रांच की जॉइंट टीम की रेड और पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. किडनी तस्करों और सौदागरों का नेटवर्क वेस्ट उत्तर प्रदेश से बिहार और वेस्ट बंगाल तक फैला हुआ है. किडनी डोनर भी बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला था. खास बात यह है कि डोनर ने साफ तौर पर माना कि किडनी के लिए डील हुई थी. डील 8 से 10 लाख के बीच हुई थी और किडनी 70 से 80 लाख में बेची गई थी.
पूछताछ में यह भी पता चला कि डोनर आयुष से मेरठ में कॉन्टैक्ट हुआ था, जहां वह रहता था. शुरुआती पूछताछ में उसने खुद को MBA स्टूडेंट बताया. हालांकि, देर रात तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी क्योंकि वह बार-बार अपना बयान बदल रहा था. आयुष पुलिस से बार-बार झूठ बोल रहा था. रेड के बाद से ही वह घबराया हुआ था. उसने किसी को फ़ोन करके कहा, “मुझे यहां से निकालो. मुझे दर्द हो रहा है. चिंता मत करो… मैं जेल चला जाऊंगा लेकिन किसी का नाम नहीं लूंगा.” पुलिस को उसके पास से कुछ डॉक्युमेंट्स मिले हैं जिनसे उसकी पहचान पता चली है. पूछताछ में यह भी पता चला कि जिस डोनर को वह अपनी बहन बता रहा था, वह उसकी बहन नहीं लगती थी. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि किडनी रैकेट में और कौन-कौन शामिल है और कितनी किडनी कहाँ-कहाँ ट्रांसप्लांट की गई हैं.
कानपुर: किडनी तस्करी सिंडिकेट से जुड़ा मामला। पूरी रात चली छापेमारी और जांच। हॉस्पिटल में डोनर से टीम ने की पूछताछ। डोनर का दावा- दलाल शिवम ने दिए 4 लाख रुपये। कानपुर पुलिस कर सकती है मामले का पर्दाफाश।@kanpurnagarpol #Kanpur #Crime #KidneyRacket
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— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) March 31, 2026
एक जाने-माने सर्जन के हॉस्पिटल का एक कर्मचारी इस दलाली में शामिल
इस मामले में पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया दलाल शुभम एक जाने-माने किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन के हॉस्पिटल में काम करता था. कानपुर और आस-पास के कई ज़िलों से मरीज़ वहाँ किडनी का इलाज कराने आते थे. शुभम उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट का झांसा देकर फुसलाता था. पुलिस उससे पूछताछ कर रही है.
10 से 15 गुना ज़्यादा मुनाफ़े पर बेची जाती थीं किडनी
पुलिस की जाँच में पता चला कि यह गैंग डोनर्स को 8 से 10 लाख रुपये में ट्रांसप्लांट के लिए मना लेता था. फिर मरीज़ के फाइनेंशियल बैकग्राउंड के आधार पर किडनी 70 से 80 लाख रुपये में बेची जाती थी. कभी-कभी डोनर को सिर्फ़ चार से पांच लाख रुपये देकर भेज दिया जाता था. आयुष ने भी शुरू में बताया कि उसे चार लाख रुपये दिए गए थे. पुलिस को पता चला है कि लखनऊ से डॉक्टरों की एक टीम यहां किडनी ट्रांसप्लांट करने आती थी. बाद में डोनर और रिसीवर को छोटे अस्पतालों में भर्ती कराया जाता था.