डेली24भारत डेस्क:भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए दिवाली के दौरान होने वाली आतिशबाजी को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने पराली जलाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को लेकर किए जाने वाले दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये बातें भ्रामक और असत्य हैं।
मेनका गांधी ने कहा कि दिवाली से ठीक तीन दिन पहले तक दिल्ली की हवा पूरी तरह साफ रहती है, लेकिन दिवाली के बाद से नए साल तक हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। उनके अनुसार, यदि वास्तव में प्रदूषण की वजह पराली या गाड़ियां होतीं, तो दिवाली से पहले ही हवा खराब होनी चाहिए थी। उन्होंने दावा किया कि केवल एक दिन में, अगर दिल्ली में करीब 800 करोड़ रुपये के पटाखे जलाए जाते हैं, तो उसका सीधा और गंभीर असर वायु गुणवत्ता पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि दशहरे, शादियों, नए साल, क्रिकेट मैचों और अन्य आयोजनों में भी जब-तब पटाखे जलाए जाते हैं, जिसके कारण आम जनता को जहरीली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
दिल्ली: दिवाली पर पटाखों को लेकर मेनका गांधी का बड़ा बयान। दिल्ली प्रदूषण का ठीकरा दिवाली की आतिशबाजी पर फोड़ा। पराली और गाड़ियों से प्रदूषण की बात को बताया झूठ। ग्रीन पटाखों की अनुमति पर सुप्रीम कोर्ट पर भी जताई नाराज़गी। कहा- “ग्रीन पटाखे नाम की कोई चीज नहीं होती” राम-सीता के… pic.twitter.com/cmDbp1gHwH
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) January 6, 2026
मेनका गांधी ने पटाखे जलाने वालों के लिए बेहद कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें “देशद्रोही” तक कह दिया। उन्होंने कहा कि उनके मन में ऐसे लोगों के लिए इससे अलग कोई और शब्द नहीं है, क्योंकि वे अपने मनोरंजन के लिए देश और जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक बारिश नहीं होती, तब तक प्रदूषण से राहत मिलना मुश्किल है। लेकिन बारिश होने पर भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती, क्योंकि हवा में मौजूद जहरीले रसायन जमीन में समा जाते हैं, जिससे मिट्टी और पर्यावरण लंबे समय तक दूषित हो जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्रीन पटाखों की अनुमति दिए जाने पर भी मेनका गांधी ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि “ग्रीन पटाखा” जैसी कोई चीज होती ही नहीं है। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला गलत है और अदालत को या तो पूरी तरह पटाखों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए या फिर यह साफ कह देना चाहिए कि लोग प्रदूषण से मरने के लिए तैयार रहें। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग सबसे ज्यादा पटाखे जलाते हैं, वही सरकार पर सवाल उठाते हैं कि वह कुछ कर क्यों नहीं रही।
धार्मिक परंपराओं से जुड़े एक सवाल पर मेनका गांधी ने कहा कि जब भगवान राम और माता सीता वनवास से लौटे थे, तब पटाखे नहीं जलाए गए थे। उस समय केवल दीये जलाने की परंपरा थी। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यह भी स्पष्ट नहीं है कि उस समय तेल उपलब्ध था या नहीं, लेकिन यह तय है कि उस युग में पटाखों जैसी कोई चीज नहीं थी। कुल मिलाकर, मेनका गांधी ने दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी को न सिर्फ पर्यावरण के लिए घातक बताया, बल्कि इसे परंपरा के नाम पर किया जाने वाला एक खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना कृत्य भी बताया।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर