Daily 24 भारत डेस्क: देश की राजधानी दिल्ली, जहां से नीति और प्रशासन की दिशा तय होती है, वहीं लोगों के पीने के पानी और गंदे पानी की जांच से जुड़ी लैब्स के एक्रेडिटेशन के मामले में वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे निचले पायदान पर है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक दिल्ली सरकार के अधीन 25 से अधिक पब्लिक वॉटर टेस्टिंग लैब्स में से सिर्फ दो को ही नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) की मान्यता हासिल है।
चौंकाने वाली बात यह है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की पानी की लैब को अब तक NABL एक्रेडिटेशन नहीं मिल पाया है। यही लैब यमुना नदी के पानी की मासिक गुणवत्ता जांच के साथ-साथ सीवेज और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स तथा नालों के पानी के एनालिसिस के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में इन रिपोर्ट्स की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। NABL एक ऑटोनॉमस बॉडी है, जो यह सुनिश्चित करती है कि टेस्टिंग लैब्स ग्लोबल स्टैंडर्ड और सटीकता के मानकों पर खरी उतरें। NABL के मौजूदा रिकॉर्ड के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की सिर्फ हैदरपुर और वजीराबाद स्थित दो जोनल लैब्स ही मान्यता प्राप्त हैं। वहीं DJB की एक अन्य लैब ने अक्टूबर महीने में अपना एक्रेडिटेशन खो दिया।
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब दिल्ली में इस साल हैजा के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है और ट्रीटेड व गंदे पानी में खतरनाक स्तर के एफ्लुएंट्स पाए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन (JJM) के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी पानी की गुणवत्ता जांच लैब्स को NABL से एक्रेडिटेड करवाना अनिवार्य किया गया है, ताकि डेटा की सटीकता और भरोसेमंदता सुनिश्चित की जा सके। दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक, दिल्ली जल बोर्ड ने कुछ लैब्स के लिए NABL एक्रेडिटेशन हेतु आवेदन किया है, हालांकि इस मुद्दे पर DPCC की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के 4 दिसंबर के एक डॉक्यूमेंट के अनुसार, तमिलनाडु, त्रिपुरा, सिक्किम और नागालैंड में 100 प्रतिशत पब्लिक वॉटर टेस्टिंग लैब्स NABL-एक्रेडिटेड हैं। हरियाणा में यह आंकड़ा 98 प्रतिशत, असम में 94 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 66 प्रतिशत है। वहीं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 11 में से सिर्फ एक लैब मान्यता प्राप्त है। इसके मुकाबले दिल्ली का एक्रेडिटेशन रेट 8 प्रतिशत से भी कम है।
डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, जल जीवन मिशन के तहत देशभर में कुल 2,847 पानी की गुणवत्ता जांच लैब्स हैं, जिनमें से 1,678 यानी करीब 59 प्रतिशत को NABL की मान्यता मिल चुकी है। टीम अर्थ वॉरियर के कार्यकर्ता पंकज कुमार ने इस स्थिति को “राष्ट्रीय शर्मिंदगी” बताते हुए कहा कि प्रदूषण, पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक कचरे से जूझ रही राजधानी में पानी की गुणवत्ता पहले ही एक गंभीर समस्या है। ऐसे में टेस्टिंग लैब्स का एक्रेडिटेशन न होना जनता की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर दिल्ली जल बोर्ड को पत्र भी लिखा है।