डेली24भारत डेस्क: बांग्लादेश एक बार फिर भीषण हिंसा और अशांति की चपेट में है। हाल की घटनाओं ने देश की कानून-व्यवस्था को गंभीर चुनौती दी है। राजधानी ढाका सहित कई इलाकों में भड़के विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया, जहां उग्र भीड़ ने सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को निशाना बनाया। कई इमारतों में तोड़फोड़ की गई और आगजनी की घटनाएं हुईं।
शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद लोगों में गहरा आक्रोश फैल गया, जिसके चलते हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे ये प्रदर्शन जल्द ही बेकाबू हो गए। इसी दौरान उग्र भीड़ के एक हिस्से ने देश के प्रमुख और प्रतिष्ठित दैनिक अखबार प्रोथोम आलो के कार्यालय पर हमला कर दिया और पूरी इमारत को आग के हवाले कर दिया।
हमले के समय अखबार के दफ्तर में कई पत्रकार और कर्मचारी मौजूद थे, जो अगले दिन के अखबार और डिजिटल कंटेंट की तैयारी में जुटे थे। हालात अचानक इतने भयावह हो गए कि सभी को अपनी जान बचाने के लिए कार्यालय से बाहर भागना पड़ा। हमलावरों ने दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ की, जिससे अखबार का प्रिंट संस्करण और ऑनलाइन प्रकाशन दोनों पूरी तरह ठप हो गए।
संपादक ने बताया कि यह घटना देर रात की है, जब कामकाज पूरे चरम पर था। उन्होंने कहा कि जनता के गुस्से का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों ने मीडिया संस्थान को निशाना बनाया। इस हमले से पत्रकारों में गहरा डर और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
हमले के कारण प्रोथोम आलो अपना प्रिंट संस्करण प्रकाशित नहीं कर सका, जबकि उसका डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बंद हो गया। संपादक के अनुसार, “1998 में स्थापना के बाद से पिछले 27 वर्षों में यह पहली बार है जब हमारा अखबार प्रकाशित नहीं हो पाया। यह केवल हमारे लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश की पत्रकारिता के लिए बेहद काला दिन है।”
घटना की गंभीरता को देखते हुए अखबार प्रबंधन ने सरकार से निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। उन्होंने हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें सख्त सजा दिलाने की अपील की। उनके अनुसार, यह हमला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आज़ादी पर सीधा प्रहार है।
अखबार के एग्जीक्यूटिव एडिटर सज्जाद शरीफ ने इस घटना को बांग्लादेश की पत्रकारिता के इतिहास की सबसे काली रात करार दिया। उन्होंने कहा कि ढाका के कारवानबाजार स्थित कार्यालय पर हुआ हमला लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्र मीडिया पर सीधा हमला है, जिसने 27 वर्षों के इतिहास में पहली बार अखबार को अपना प्रकाशन रोकने पर मजबूर कर दिया।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर