डेली24भारत डेस्क: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में हाल के बदलावों को लेकर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि देश के करोड़ों ग्रामीण गरीबों, मजदूरों, किसानों और वंचित वर्गों के लिए जीवन जीने का सहारा रही है। ऐसे में इस योजना को कमजोर करना सीधे तौर पर गरीबों के अधिकारों पर हमला है।
सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि लगभग 20 वर्ष पहले, जब देश के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह थे, तब संसद ने सर्वसम्मति से मनरेगा कानून को पारित किया था। यह एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम था, जिसने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल दी। इस कानून के माध्यम से करोड़ों ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी मिली और विशेष रूप से वंचित, शोषित, गरीब और अतिगरीब तबकों को सम्मानजनक आजीविका का साधन प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ने न केवल रोजगार उपलब्ध कराया, बल्कि ग्राम पंचायतों को भी सशक्त बनाया। इस योजना के जरिए महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को साकार करने की दिशा में ठोस और व्यावहारिक कदम उठाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को बढ़ावा मिला और स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिली। ऐसे में सरकार द्वारा इस योजना को कमजोर करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
सोनिया गांधी ने हालिया सरकारी फैसलों पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा पर मानो “बुलडोजर चला दिया” है। उन्होंने आरोप लगाया कि न केवल महात्मा गांधी का नाम हटाया गया, बल्कि बिना किसी व्यापक विचार-विमर्श और विपक्ष को विश्वास में लिए मनरेगा के स्वरूप में मनमाने और एकतरफा बदलाव किए गए।
उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा कानून ने ग्रामीण भारत को रोजगार का कानूनी अधिकार दिया था, जिससे मजबूरी में होने वाले पलायन पर काफी हद तक रोक लगी। इस योजना ने किसानों, मजदूरों और भूमिहीन गरीबों को अपने ही गांव में काम करने का अवसर दिया और ग्राम पंचायतों को निर्णय लेने की ताकत दी। यह महात्मा गांधी के आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के सपने की ओर एक मजबूत कदम था।
सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि मनरेगा को लाने और लागू करने में कांग्रेस की अहम भूमिका रही है, लेकिन यह योजना कभी किसी एक राजनीतिक दल की नहीं रही। मनरेगा देशहित और जनहित से जुड़ा कानून है। इसे कमजोर करना करोड़ों किसानों, श्रमिकों और गरीब परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर