Daily 24 भारत डेस्क: कच्चे तेल के वैश्विक बाजार में उस समय हलचल मच गई जब अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सीजफायर को लेकर बड़ा बयान दिया. इस ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई. खास तौर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 15% तक की गिरावट देखी गई, जिससे यह $100 प्रति बैरल के नीचे आ गया.
15% तक टूटा ब्रेंट क्रूड, निवेशकों में हलचल
सीजफायर की खबर सामने आते ही निवेशकों ने तेल बाजार में बिकवाली शुरू कर दी. ब्रेंट क्रूड, जो लंबे समय से $100 के ऊपर ट्रेड कर रहा था, अचानक फिसलकर नीचे आ गया. यह गिरावट दर्शाती है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से सप्लाई को लेकर चिंताएं घटती हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है.
सीजफायर से कम हुआ जियोपॉलिटिकल रिस्क
तेल की कीमतों पर सबसे ज्यादा असर अंतरराष्ट्रीय तनाव का होता है. जैसे ही सीजफायर की घोषणा हुई, बाजार ने इसे सकारात्मक संकेत के रूप में लिया. इससे मिडिल ईस्ट और अन्य तेल उत्पादक क्षेत्रों में स्थिरता की उम्मीद बढ़ी. OPEC देशों की सप्लाई पर भी इसका असर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ने की संभावना बनती है.
भारत समेत दुनिया के लिए राहत की खबर
तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारत जैसे आयातक देशों को मिलता है. India अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में कमी से महंगाई पर काबू पाने में मदद मिल सकती है. पेट्रोल-डीजल के दाम भी स्थिर या कम हो सकते हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिलेगी.
आगे क्या रहेगा तेल बाजार का रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सीजफायर लंबे समय तक कायम रहता है, तो तेल की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है. हालांकि, बाजार अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं है और किसी भी नए भू-राजनीतिक घटनाक्रम से कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. तो कुल मिलाकर, Donald Trump के सीजफायर ऐलान ने तेल बाजार में बड़ा असर डाला है और फिलहाल यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक राहत भरी खबर मानी जा रही है.