Daily 24 भारत डेस्क: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रणनीतिक रूप से अहम Strait of Hormuz को दोबारा खोलने को लेकर गुरुवार को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई. ब्रिटेन की अगुवाई में हुई इस वर्चुअल बैठक में भारत समेत कई देशों ने हिस्सा लिया और समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर चर्चा की गई.
भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बैठक में हिस्सा लिया. इस दौरान भारत ने साफ तौर पर कहा कि वह ऐसा इकलौता देश है जिसने इस संकट में अपने नाविकों को खोया है. भारत ने जोर देते हुए होर्मुज स्ट्रेट को जल्द से जल्द खोलने की वकालत की, ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो. बैठक की अध्यक्षता ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने की. इसमें फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. हालांकि, अमेरिका इस बैठक का हिस्सा नहीं था.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मुक्त और सुरक्षित समुद्री आवागमन का समर्थन करता है. उन्होंने कहा कि भारत लगातार इस बात की मांग कर रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाए. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद हुई, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ जारी तनाव के संदर्भ में कहा था कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी अन्य देशों को उठानी चाहिए.
सूत्रों के मुताबिक इस बैठक से तुरंत कोई ठोस समाधान निकलने की संभावना कम है. इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगों की आशंका और सुरक्षा जोखिमों के चलते जहाजों की सुरक्षित आवाजाही एक जटिल मुद्दा बना हुआ है. इसके लिए ईरान के साथ समन्वय बेहद जरूरी माना जा रहा है. गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी का परिवहन होता है. इसके लगभग बंद होने से वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है.
पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत रहा है, ऐसे में इस मार्ग का खुला रहना भारत की आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.