डेली24भारत डेस्क: ईरान में Iran पर United States और Israel के हमलों के बाद पूरी दुनिया की नजर एक बार फिर पश्चिम एशिया पर टिक गई है। हमलों के जवाब में ईरान द्वारा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz को बंद करने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। यही समुद्री मार्ग अरब देशों से निकलने वाले तेल और गैस को एशिया, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों तक पहुंचाता है। ऐसे में भारत सहित कई देशों में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। इस स्थिति ने एक अहम सवाल फिर से खड़ा कर दिया है—आखिर पश्चिम एशिया की धरती में ही दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार क्यों मौजूद हैं और क्यों आज भी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था इस क्षेत्र पर इतनी ज्यादा निर्भर है। इसका जवाब करोड़ों वर्षों पुराने भूवैज्ञानिक इतिहास में छिपा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
Strait of Hormuz फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा लेकिन अत्यंत रणनीतिक समुद्री मार्ग है। Saudi Arabia, United Arab Emirates, Kuwait, Qatar, Iraq और Iran जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का अधिकांश कच्चा तेल इसी मार्ग से दुनिया तक पहुंचता है।
जब भी इस मार्ग पर संकट आता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं और ऊर्जा संकट की आशंका पैदा हो जाती है। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करते हैं, इस स्थिति से तुरंत प्रभावित होते हैं।
पश्चिम एशिया में तेल की खोज की ऐतिहासिक शुरुआत
पश्चिम एशिया को ऊर्जा महाशक्ति बनाने की शुरुआत 1908 में Masjed-e-Soleyman में पहली बार तेल मिलने से हुई। इसके बाद पूरे क्षेत्र में तेल खोज का अभियान तेज हो गया।
प्रमुख शुरुआती तेल खोजें इस प्रकार हैं:
- ईरान (1908) – मस्जिद-ए-सुलेमान
- इराक (1927) – Kirkuk (बाबा गुरगुर)
- बहरीन (1932) – Jebel Dukhan
- सऊदी अरब (1938) – Dammam
- कुवैत (1938) – Burgan Oil Field
- कतर (1939–1940) – दुखान
- संयुक्त अरब अमीरात (1958) – मुरबान बाब
इन खोजों ने पश्चिम एशिया को दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा केंद्र बना दिया।
करोड़ों साल पहले रेगिस्तान नहीं था, बल्कि समुद्र था
आज जिस क्षेत्र को हम अरब का रेगिस्तान कहते हैं, वह लगभग 10 करोड़ वर्ष पहले Tethys Ocean नामक प्राचीन समुद्र के नीचे डूबा हुआ था। उस समय यह क्षेत्र समुद्री जीवों, शैवाल, प्लवक और सूक्ष्म जीवों से भरा हुआ था।
जब ये जीव मरते गए, तो समुद्र की गहराई में जमा होते चले गए। लाखों वर्षों तक तलछट की परतों और अत्यधिक दबाव तथा तापमान के प्रभाव से यही जैविक पदार्थ धीरे-धीरे हाइड्रोकार्बन यानी तेल और गैस में बदल गया।
जमीन के नीचे की आदर्श संरचना: तेल बनने और सुरक्षित रहने की पूरी व्यवस्था
तेल बनने के लिए केवल जैविक पदार्थ पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके सुरक्षित रहने के लिए जमीन के नीचे विशेष संरचना भी जरूरी होती है। पश्चिम एशिया में यह संरचना आदर्श रूप में मौजूद है।
यह संरचना तीन प्रमुख परतों से मिलकर बनती है:
- स्रोत चट्टान – जहां तेल बनता है
- भंडारण चट्टान – जहां तेल जमा होता है
- आवरण चट्टान – जो तेल को बाहर निकलने से रोकती है
दुनिया में बहुत कम स्थान ऐसे हैं जहां ये तीनों परतें एक साथ इतनी आदर्श स्थिति में मौजूद हों।
भूवैज्ञानिक स्थिरता ने बचाकर रखा तेल का खजाना
तेल के विशाल भंडार बनने और सुरक्षित रहने में Arabian Plate की भूवैज्ञानिक स्थिरता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दुनिया के कई हिस्सों में भूकंप, पर्वत निर्माण और प्लेटों की टक्कर के कारण तेल भंडार टूटकर बिखर गए। लेकिन पश्चिम एशिया में लंबे समय तक स्थिर भूगर्भीय परिस्थितियां बनी रहीं। इसके परिणामस्वरूप विशाल तेल क्षेत्र सुरक्षित रहे, बड़े भंडार एक ही स्थान पर केंद्रित रहे और खोज तथा उत्पादन आसान हो गया।
तेल निकालना सस्ता और आसान क्यों है?
पश्चिम एशिया के तेल भंडार अक्सर जमीन के ज्यादा करीब, बड़े आकार के और आपस में जुड़े हुए होते हैं। इस वजह से यहां तेल निकालने की लागत दुनिया के अन्य क्षेत्रों जैसे गहरे समुद्र या बर्फीले क्षेत्रों की तुलना में बहुत कम होती है। यही कारण है कि यहां के देश कम कीमतों पर भी तेल उत्पादन जारी रख सकते हैं।
पश्चिम एशिया का तेल गुणवत्ता में भी बेहतर
पश्चिम एशिया का कच्चा तेल सामान्यतः हल्का और कम सल्फर वाला होता है। इसका मतलब है कि इसे रिफाइन करना आसान होता है, लागत कम आती है और प्रदूषण भी अपेक्षाकृत कम होता है। इसी कारण दुनिया की रिफाइनरियां इस क्षेत्र के तेल को प्राथमिकता देती हैं।
समुद्री मार्गों की नजदीकी ने बढ़ाई वैश्विक ताकत
पश्चिम एशिया के अधिकांश तेल क्षेत्र Persian Gulf के पास स्थित हैं। यहां से तेल टैंकरों के जरिए दुनिया के अलग-अलग देशों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। इससे परिवहन लागत कम होती है, सप्लाई तेज होती है और व्यापार अधिक विश्वसनीय बनता है।
क्यों आज भी दुनिया पश्चिम एशिया पर निर्भर है?
आज दुनिया की अर्थव्यवस्था के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्र—परिवहन, बिजली उत्पादन, उद्योग, कृषि और रक्षा व्यवस्था—तेल और गैस पर निर्भर हैं। पश्चिम एशिया के पास इन संसाधनों की मात्रा, गुणवत्ता और आसान उपलब्धता तीनों मौजूद हैं। यही कारण है कि जब भी इस क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है, तो पूरी दुनिया की चिंता बढ़ जाती है।
इस तरह कहा जा सकता है कि पश्चिम एशिया की तेल शक्ति कोई संयोग नहीं है, बल्कि करोड़ों वर्षों की प्राकृतिक प्रक्रिया, भूवैज्ञानिक स्थिरता और भौगोलिक स्थिति का संयुक्त परिणाम है, जिस पर आज भी पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था टिकी हुई है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर