डेली24 भारत डेस्क: देश में आम जनता की दवा खरीदना अब और भी महंगा हो गया है. राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण के आदेश के तहत 900 से अधिक आवश्यक दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में वृद्धि की गई है. इस सूची में बुखार, दर्द, संक्रमण, एनीमिया, पोषण संबंधी आवश्यकताओं, शुगर, ब्लडप्रेशर, लिवर और पेट की दवाएं शामिल हैं. जीएसटी कटौती के बाद, एक अप्रैल 2026 से मरीजों और तीमारदारों को इन दवाओं के लिए 10 फीसदी अधिक राशि चुकानी होगी.
महंगाई का डबल डोज: बुखार, लिवर, किडनी, शुगर-BP समेत 900 से अधिक दवाएं आज से महंगी।#MedicinePriceHike #Inflation #Healthcare pic.twitter.com/31AjV3n9lE
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) April 1, 2026
फार्मा उद्योग की स्थिति देखें तो लगभग 60 फीसदी कंपनियों ने जनवरी से ही नई मैन्युफैक्चरिंग पर रेट बढ़ा दिया था. इसका मतलब है की जनवरी से बाजार में आने वाले नए बैच की दवाओं पर नई एमआरपी पहले ही लागू हो चुकी थी. थोक और रिटेल दवा बाजार दोनों में आज से दवाओं की कीमतें बढ़ जाएंगी. दैनिक उपयोग की दवाओं में औसतन 10 से 12 फीसदी का इजाफा देखने को मिलेगा. थोक दवा दुकानदारों का कहना है कि यह मुनाफा फार्मा कंपनियां सालाना अपने नियमानुसार करती हैं. वहीं, हाल ही में हुए अंतरराष्ट्रीय युद्ध या वैश्विक संकटों का इन दामों पर कोई प्रभाव नहीं है. वास्तविकता यह है कि यह रेट वृद्धि पूरी तरह से रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा है.
नए स्टॉक और कीमतों का प्रभाव
मार्केट में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लगभग 80 फीसदी नया स्टॉक पहले ही बाजार में आ चुका है. उदाहरण के लिए, जो दवा पहले 80 रुपये की थी, उसकी कीमत अब 90 से 95 रुपये हो गई है. वहीं, 100 रुपये की दवा अब 110 से 115 रुपये में बिक रही है. थोक और रिटेल व्यापारी नए स्टॉक के अनुसार ही बिक्री कर रहे हैं. पुराने स्टॉक की एमआरपी थोड़ी कम कर दी जाती है, लेकिन नया स्टॉक नई कीमतों पर उपलब्ध है.
थोक दवा व्यापारी राजीव सिंह का कहना है कि दवाओं के दाम युद्ध या किसी वैश्विक संकट के कारण नहीं बढ़े हैं. यह पूरी तरह से रूटीन रेट संशोधन का परिणाम है, जो अप्रैल के महीने में लागू होता है. दूसरे थोक व्यापारी सुनील राणा ने बताया कि कुछ फार्मा कंपनियों ने एमआरपी पहले ही बढ़ा दी थी और नया स्टॉक बाजार में उपलब्ध हो चुका है. नए स्टॉक के अनुसार ही बिक्री की जा रही है. कई कंपनियों का नया स्टॉक अप्रैल के पहले सप्ताह में पूरे देश में पहुंच जाएगा.
महंगी होने वाली प्रमुख दवाएं
इस रेट वृद्धि के बाद आम जनता को निम्नलिखित दवाओं पर अधिक खर्च करना होगा:
- पैरासिटामोल
- एंटीबायोटिक्स
- विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स
- एनीमिया की दवाएं
- दर्द निवारक दवाएं
- शुगर और ब्लडप्रेशर की दवाएं
- लिवर और पेट से संबंधित दवाएं
- त्वचा संबंधी दवाएं
इस वृद्धि से घरेलू बजट पर असर पड़ेगा, क्योंकि ये दवाएं हर परिवार के नियमित उपयोग में आती हैं. खासकर वे लोग जो लंबे समय से किसी बीमारी का इलाज करवा रहे हैं, उन्हें अब 10 से 12 फीसदी ज्यादा खर्च करने की आवश्यकता होगी.
एक तरफ जीएसटी कटौती के कारण दवा बाजार में थोड़ी राहत की उम्मीद थी, लेकिन दवाओं के रूटीन रेट संशोधन ने इसे पीछे धकेल दिया. विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि आवश्यक दवाओं के लिए आम जनता की पहुंच को थोड़ा चुनौतीपूर्ण बना सकती है. इसलिए, मरीजों और तीमारदारों को अब खरीदारी में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी और आवश्यकतानुसार थोक में दवाएं खरीदने या सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने पर विचार करना चाहिए. इस बढ़ी हुई कीमतों की खबर ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है की स्वास्थ्य और जीवनरक्षक दवाओं की पहुंच और कीमतें आम लोगों के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण हैं.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर