Daily 24 भारत डेस्क: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल के बीच केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती का बड़ा फैसला लिया है.
फ्यूल संकट के बीच सरकार की बड़ी राहत। पेट्रोल पर 13 से घटकर 3 रुपये, डीजल पर एक्साइज ड्यूटी की गई जीरो।#FuelPrice #PetrolDiesel #Economy pic.twitter.com/95qWptJz1H
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) March 27, 2026
पेट्रोलियम मंत्रालय के पीपीएसी (PPAC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में भारतीय बास्केट का औसत कच्चा तेल मूल्य 69.01 डॉलर प्रति बैरल था, जो 24 मार्च तक बढ़कर 123.15 डॉलर प्रति बैरल हो गया. यानी महज एक महीने में करीब 78% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है. कच्चे तेल की इस तेज बढ़ोतरी से तेल कंपनियों पर रिटेल कीमतें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया था. हालांकि, सरकार ने सीधे उपभोक्ताओं पर बोझ डालने के बजाय टैक्स में कटौती कर राहत देने का रास्ता चुना.
International crude prices have gone through the roof in the last 1 month from around 70 dollars/barrel to around 122 dollars/barrel. Consequently, petrol and diesel prices for consumers have gone up all over the world. Prices have increased by around 30%-50% in South East Asian…
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) March 27, 2026
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर के पार पहुंच चुकी हैं. इसके चलते दुनिया के कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी हुई है. दक्षिण-पूर्व एशिया में कीमतें 30%-50%, उत्तरी अमेरिका में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीका में करीब 50% तक बढ़ी हैं. उन्होंने कहा कि सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो अंतरराष्ट्रीय रुझान के अनुसार भारत में भी कीमतें बढ़ाई जाएं, या फिर सरकारी खजाने पर बोझ लेकर जनता को राहत दी जाए. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने दूसरा विकल्प चुना.
सरकार के इस फैसले के तहत एक्साइज ड्यूटी में कटौती की गई है, जिससे तेल कंपनियों के घाटे को कम करने में मदद मिलेगी. वर्तमान में यह घाटा पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है. इसके अलावा डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है.
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों को नियंत्रित रखना है, ताकि आम उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत मिल सके.