Daily 24 भारत डेस्क: ईरान और अमेरिका-इज़रायल के बीच जारी युद्ध को लगभग तीन सप्ताह हो चुके हैं, लेकिन हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस संघर्ष के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर आवाजाही प्रभावी रूप से ठप हो गई है, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में ईंधन आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं.
इस बीच IEA ने चेतावनी दी है कि यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. IEA के प्रमुख फातिह बिरोल ने ऑस्ट्रेलिया की राजधानी में नेशनल प्रेस क्लब को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति पहले आए दो बड़े तेल संकटों के संयुक्त प्रभाव जैसी बन चुकी है. उन्होंने कहा कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो दुनिया का कोई भी देश इसके प्रभाव से अछूता नहीं रहेगा.
दुनिया के एनर्जी चीफ का बड़ा बयान -“कोई देश इस संकट से नहीं बचेगा”। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने पर जताई गंभीर चिंता। वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है भारी असर। कई देशों में बढ़ सकते हैं ईंधन के दाम। ऊर्जा संकट से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर खतरा।#GlobalCrisis #EnergyAlert… pic.twitter.com/oEkw2292iy
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) March 23, 2026
IEA पहले भी इस संभावित तेल संकट को लेकर आगाह कर चुका है. हाल ही में एजेंसी के सदस्य देशों ने 40 करोड़ बैरल तेल अपने आपातकालीन भंडार से जारी करने का फैसला किया, जो इसके इतिहास की सबसे बड़ी निकासी मानी जा रही है. इसके साथ ही सरकारों, कंपनियों और आम लोगों को ऊर्जा खपत कम करने के उपाय अपनाने की सलाह भी दी गई है.
युद्ध के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना गुजरने वाले करीब 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई बाधित हो गई है. इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जबकि डीजल, जेट ईंधन और एलपीजी जैसी वस्तुओं की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला है. तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे के भीतर हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि ऐसा न करने पर अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा.
इस पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ईरान ने साफ कहा है कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया गया, तो वह न केवल हॉर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से बंद कर देगा, बल्कि उन सभी देशों के ऊर्जा केंद्रों को भी निशाना बनाएगा जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. मौजूदा हालात ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और गहरा सकता है.