Daily 24 भारत डेस्क: ईरान–इजराइल तनाव के बाद दुनिया को लग रहा था कि हालात सामान्य हो रहे हैं, लेकिन नई रिपोर्ट्स ने एक अलग ही चिंता खड़ी कर दी है. बताया जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान ने भारी शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ सकता है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के दौरान इस अहम समुद्री मार्ग के बाधित होने से जितना नुकसान हुआ, वह मिसाइल हमलों से भी ज्यादा गंभीर था. अब जबकि रास्ता दोबारा खुल रहा है, ईरान कथित तौर पर इसे “टोल रूट” की तरह इस्तेमाल कर रहा है.
क्या है पूरा मामला?
- ईरान पर आरोप है कि वह हर कॉमर्शियल जहाज से करीब 20 लाख डॉलर (लगभग 18 करोड़ रुपये) तक शुल्क ले रहा है.
- कुछ जहाजों द्वारा यह भुगतान किए जाने की भी खबर है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि और भुगतान प्रणाली स्पष्ट नहीं है.
- यह जलडमरूमध्य दुनिया के 20% से ज्यादा तेल सप्लाई का प्रमुख रास्ता है.
भारत पर क्या होगा इसका असर?
भारत अपनी आधे से ज्यादा तेल और गैस की जरूरत इसी मार्ग से पूरी करता है.
यदि यह शुल्क जारी रहता है, तो भारत के लिए ऊर्जा आयात महंगा हो सकता है, जिसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है.
अंतरराष्ट्रीय कानून पर सवाल
अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री मार्गों से गुजरने पर किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जा सकता.
भारत ने भी हाल ही में इस सिद्धांत का समर्थन किया है.
अगर ईरान वाकई शुल्क वसूल रहा है, तो इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जा सकता है.
क्यों बढ़ी चिंता?
यह कदम दिखाता है कि युद्ध के बाद ईरान इस रणनीतिक मार्ग पर अपना प्रभाव और मजबूत करना चाहता है. इस रास्ते से सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थ, धातु और अन्य जरूरी सामान भी बड़े पैमाने पर गुजरते हैं. हालांकि युद्ध विराम से राहत जरूर मिली है, लेकिन अगर यह “टोल सिस्टम” जारी रहता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चुनौती बन सकता है — और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा.