डेली24 भारत डेस्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है. स्मार्टफोन से लेकर होम असिस्टेंट्स, ऑटोमेटेड कार, रोबोटिक फैक्ट्री मशीनें और डिजिटल हेल्पर-AI हर जगह मौजूद है. हमारी दैनिक जिंदगी में यह तकनीक अब सिर्फ सहायक नहीं बल्कि कई मामलों में काम का मुख्य आधार बन गई है. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि आने वाले कुछ ही सालों में AI हमारे लिए काम करने वाले सहयोगी से हमें पूरी तरह बदलकर रिप्लेस कर सकता है? जाने-माने AI रिसर्चर और लातविया मूल के कम्प्यूटर साइंटिस्ट,डॉ. रोमन याम्पोल्स्की ने यह चेतावनी दी है.
डॉ. याम्पोल्स्की का मानना है कि केवल एक साल में ही AI इंसानों की 99 फीसदी नौकरियों को खा सकता है. उनके अनुसार, कोई भी इंसानी काम ऐसा नहीं है जिसे भविष्य में ऑटोमेट नहीं किया जा सकता. उनका कहना है कि AI की गति इतनी तेज़ है कि यह इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन जैसी पुरानी तकनीकी क्रांतियों से पूरी तरह अलग परिणाम ला सकता है. 2045 तक समाज एक ऐसा टेक्नोलॉजिकल पॉइंट पार कर सकता है, जहां से पीछे लौटना लगभग असंभव होगा.
डॉ. याम्पोल्स्की ने स्टीवन बार्टलेट द्वारा होस्ट किए गए ‘द डायरी ऑफ ए CEO’ में इस बारे में विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में फिजिकल लेबर की हर तरह की नौकरियां ऑटोमेट की जा सकती हैं. इसका मतलब यह है कि निर्माण, निर्माण सामग्री, लॉजिस्टिक्स, रिपेयरिंग, क्लीनिंग और अन्य मैन्युअल कार्यों में इंसानी श्रम की जरूरत लगभग खत्म हो जाएगी. यह केवल नौकरियों की हानि की बात नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकता है.
AI एक्सपर्ट रोमन याम्पोल्स्की की बड़ी चेतावनी। सिर्फ एक साल में 99 % जॉब्स खा जाएगा AI, ऑटोमेशन की रफ्तार से बदल जाएगी दुनिया।#ArtificialIntelligence #RomanYampolskiy #UnemploymentCrisis pic.twitter.com/b26JLOpv2N
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) February 14, 2026
कौन सी नौकरियां बचेंगी?
अधिकांश नौकरियां AI की वजह से खतरे में हैं, डॉ. याम्पोल्स्की ने यह भी बताया कि कुछ नौकरियां इंसानी विशेषताओं के कारण बच सकती हैं. उदाहरण के लिए, ऐसे काम जहां ग्राहक या उपभोक्ता विशेष रूप से इंसान से सेवा चाहें, जैसे कि लक्ज़री अकाउंटिंग या निजी प्रशिक्षक. इसके अलावा, उन क्षेत्रों में भी नौकरियां बच सकती हैं जहां हस्तशिल्प या क्रिएटिविटी की वजह से इंसानी टच की मांग होती है. डॉ. याम्पोल्स्की के अनुसार, AI निगरानी और रेगुलेशन के लिए भी कुछ जॉब्स बने रहेंगे. हालांकि, उनका मानना है कि लंबी अवधि में AI को पूरी तरह नियंत्रित करना शायद असंभव हो. लेकिन इंसानी निगरानी बदलाव की गति को धीमा करने में मदद कर सकती है.
समाज और आर्थिक बदलाव
AI द्वारा नौकरियों के बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन से बेरोजगारी का स्तर अब तक के इतिहास में सबसे ऊँचा हो सकता है. डॉ. याम्पोल्स्की ने स्पष्ट किया की यह सिर्फ 10 या 20 फीसदी की बेरोज़गारी नहीं होगी, बल्कि 99 फीसदी तक नौकरियां खतरे में हैं. इसका अर्थ है की समाज में धन और संसाधनों का वितरण पूरी तरह बदल जाएगा. ऐसी स्थिति में इंसानों के लिए सिर्फ उच्च-विशेषज्ञता वाले या क्रिएटिव कार्य बचे रहेंगे, जबकि अधिकांश कार्य मशीनों द्वारा संभाले जाएंगे. डॉ. याम्पोल्स्की की चेतावनी केवल तकनीकी बदलाव के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव की भी झलक देती है. यह बदलाव मानवता के लिए नए प्रश्न खड़े करेगा: क्या AI को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है? क्या इंसानी रोजगार को बचाने के उपाय किए जा सकते हैं? और क्या समाज इस बदलाव के लिए तैयार है?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निस्संदेह मानव जीवन को सरल और सुविधाजनक बना रहा है. लेकिन डॉ. रोमन याम्पोल्स्की की चेतावनी यह है की अगर हमने समय रहते AI के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर नियंत्रण नहीं रखा, तो आने वाले वर्षों में यह तकनीक न केवल हमारे कार्यक्षेत्र बल्कि हमारे जीवन के हर पहलू को बदल सकती है. इंसानी कौशल, संवेदनशीलता और रचनात्मकता की महत्वपूर्ण भूमिकाएं बच सकती हैं, लेकिन समाज को तैयारी करनी होगी. AI के युग में इंसान और मशीन के बीच संतुलन बनाए रखना अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर