डेली24भारत डेस्क: शुक्रवार, 23 जनवरी को पूरे देश में बसंत पंचमी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व न केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि विद्या, बुद्धि, कला और वाणी की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना का भी विशेष दिन माना जाता है। इस अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। जगह-जगह मां सरस्वती की भव्य और आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं, जिनकी विधिवत पूजा-अर्चना की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
इस वर्ष की बसंत पंचमी को अत्यंत शुभ और दुर्लभ माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन चार विशेष योगों—सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, शिव योग और महासिद्धि योग—का अद्भुत संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन योगों में की गई मां सरस्वती की उपासना साधक के जीवन में ज्ञान, विवेक, रचनात्मकता और सफलता के द्वार खोलती है।
23 जनवरी को सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 38 मिनट पर होगा। माघ शुक्ल पंचमी तिथि पूरे दिन प्रभावी रहेगी, जो रात 12 बजकर 8 मिनट तक विद्यमान रहेगी। सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन और पूरी रात रहेगा, जबकि सुबह 9 बजकर 14 मिनट के बाद महासिद्धि योग का शुभारंभ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस दिन पंचमी तिथि का पूर्वाह्न काल होता है, उसी दिन बसंत पंचमी मनाई जाती है, इसलिए इस वर्ष शुक्रवार को ही सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाएगा।
पूजा-अर्चना के लिए कई शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं। सुबह 7 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक पहला शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक तथा अमृतकाल मुहूर्त सुबह 9 बजकर 31 मिनट से 11 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इन पावन समयों में मां सरस्वती की आराधना करने से जीवन में ज्ञान, सुख, समृद्धि और आत्मिक शांति का संचार होता है।
राम मंदिर: आस्था की पाँच सौ वर्ष पुरानी प्रतीक्षा का ऐतिहासिक समापन
22 जनवरी 2024 की तिथि भारतीय इतिहास और सनातन संस्कृति के लिए स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो चुकी है। इसी दिन पाँच सौ वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हुई और अयोध्या के राम मंदिर में रामलला का भव्य पदार्पण हुआ। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संघर्ष, न्यायिक प्रक्रिया और राष्ट्रीय आस्था की विजय का प्रतीक था।
9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर विवाद का ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए रामलला के भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। कोर्ट के निर्देशानुसार एक ट्रस्ट के गठन का आदेश दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप 5 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट अस्तित्व में आया। ट्रस्ट के गठन के साथ ही मंदिर निर्माण की प्रक्रिया ने गति पकड़ी।
इसके बाद 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमि पूजन किया गया, जिसने इस ऐतिहासिक परियोजना को नई ऊर्जा दी। अंततः 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री मोदी ने रामलला का नेत्रोन्मिलन कर प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई। इस भव्य आयोजन को ट्रस्ट ने “प्रतिष्ठा द्वादशी” का नाम दिया।
हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जा रही वर्षगांठ
ग्रेगोरियन कैलेंडर के स्थान पर हिंदू पंचांग के अनुसार प्रतिष्ठा द्वादशी पर वर्षगांठ मनाने की परंपरा शुरू की गई। इसी कारण वर्ष 2025 में यह पर्व दो बार मनाया गया—
पहली बार 11 जनवरी 2025 को और दूसरी बार 31 दिसंबर 2025 को। इस अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशिष्ट अतिथि रहे।
इसके पूर्व 25 नवंबर, विवाह पंचमी के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर में ध्वजारोहण कर पूरे विश्व को सनातन धर्म की ध्वज-पताका फहराने का संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक तरीके से पाँच सौ वर्षों तक चला राम मंदिर आंदोलन, विश्व इतिहास में अद्वितीय है।
दो वर्षों में दस करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को अब दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से सनातन धर्म को मानने वाले श्रद्धालुओं की अयोध्या में अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी। साधु-संतों, राजनीतिज्ञों, फिल्मी सितारों, खिलाड़ियों और संवैधानिक पदों पर आसीन विशिष्ट जनों ने रामलला के दर्शन किए।
औसतन प्रतिदिन लगभग एक लाख श्रद्धालु रामलला के दरबार में माथा टेक रहे हैं। प्रयागराज में आयोजित पिछले महाकुंभ के दौरान मात्र 45 दिनों में चार करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। अनुमान के अनुसार, अब तक दो वर्षों में दस करोड़ से अधिक भक्त रामलला के दर्शन कर चुके हैं।
संवैधानिक पदों पर आसीन गणमान्य जनों की उपस्थिति
राम मंदिर में दर्शन करने वालों में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश सहित देश के सर्वोच्च पदों पर आसीन रामभक्त भी शामिल रहे हैं।
- 1 मई 2024 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू परिवार सहित दर्शन के लिए पहुंचीं।
- 10 मई 2024 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दर्शन किए।
- जुलाई 2024 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने रामलला के दर्शन किए।
- 11 मार्च 2024 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अयोध्या पहुंचे।
- 24 जुलाई 2025 को नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने भी दर्शन-पूजन किया।
इसके अतिरिक्त, 20 से अधिक राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने रामलला के दर्शन किए, जिनमें से छह से अधिक मुख्यमंत्रियों ने अपनी पूरी कैबिनेट के साथ उपस्थिति दर्ज कराई।
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं की भी आस्था
प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अब तक कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ राजनयिक राम मंदिर पहुंच चुके हैं।
- 8 फरवरी 2024 को फिजी के उप प्रधानमंत्री विमान प्रसाद ने प्रतिनिधिमंडल के साथ दर्शन किए।
- 25 फरवरी 2024 को नेपाल के विदेश मंत्री नारायण प्रसाद सऊद अयोध्या पहुंचे।
- 5 सितंबर 2025 को भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने रामलला के दर्शन किए।
- 12 सितंबर 2025 को मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन चंद्र रामगुलाम परिवार सहित पहुंचे।
- 14 दिसंबर 2024 को नेपाली सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल ने मंदिर में पूजा-अर्चना की।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर