Daily 24 भारत डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आक्रामक तेवर एक बार फिर चर्चा में है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के हालिया वीडियो में उनका वही अंदाज दिखा, जिसमें वे हाथ में माइक लेकर मुट्ठी उठाती हैं और जोशीले अंदाज में हुंकार भरती नजर आती हैं.
आगामी विधानसभा चुनाव को ममता बनर्जी आसान नहीं मान रहीं. उन्हें 15 साल की सत्ता विरोधी लहर के साथ-साथ चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से पैदा हुई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. आरोप है कि इस प्रक्रिया में कई मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं. राज्य में करीब 27% मुस्लिम आबादी होने के कारण यह मुद्दा अहम बन गया है.
ममता बनर्जी ने SIR को ही राजनीतिक हथियार बना लिया है. वे लगातार इसे BJP की साजिश बताते हुए कह रही हैं कि यह बंगाली अस्मिता पर हमला है. TMC का चुनावी गीत ‘जोतोई कोरो हमला, आबार जीतबे बांग्ला’ भी इसी संदेश को आगे बढ़ा रहा है. साथ ही, वे ED, CBI और आयकर विभाग की कार्रवाइयों को भी राजनीतिक दबाव का हिस्सा बता रही हैं.
बताया जा रहा है कि SIR के तहत करीब 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिससे यह मुद्दा चुनाव का केंद्र बन गया है. जहां BJP इसे घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई बता रही है, वहीं ममता का आरोप है कि इसके बाद केंद्र सरकार NRC लागू कर सकती है और लोगों को डिटेंशन कैंप भेजा जा सकता है.
इस बीच, SIR का असर BJP पर भी पड़ा है. मटुआ समुदाय के कई नाम भी सूची से हटे हैं. पिछले चुनाव में इस समुदाय का समर्थन BJP को मिला था, लेकिन इस बार नाराजगी का खतरा है. कूचबिहार, नदिया, दिनाजपुर, मालदा और उत्तर 24 परगना की करीब 40 सीटों पर इसका असर पड़ सकता है. केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है.
BJP के सामने सबसे बड़ी समस्या मजबूत मुख्यमंत्री चेहरे की कमी है. सुवेंदु अधिकारी को दावेदार माना जा रहा है, लेकिन पार्टी ने अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है. दूसरी ओर, ममता बनर्जी की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के जरिए महिलाओं में मजबूत पकड़ बनी हुई है, जिसके करीब 2.25 करोड़ लाभार्थी हैं. BJP ने भी इस योजना की राशि बढ़ाने का वादा किया है, लेकिन उसकी रैलियों में महिलाओं की भागीदारी कम दिख रही है.
विश्लेषकों के मुताबिक, महिलाओं में TMC की पकड़ BJP से करीब 10% ज्यादा है, जबकि पुरुषों में यह अंतर सिर्फ 4% है. हालांकि SIR में बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम कटने से TMC को नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है.
राजनीतिक लड़ाई में सांस्कृतिक पहचान भी बड़ा मुद्दा बनी हुई है. TMC का दावा है कि BJP का बंगाली भाषा और संस्कृति से जुड़ाव नहीं है. वहीं, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं के हिंदी भाषण इस बहस को और हवा दे रहे हैं.
वर्तमान में TMC और BJP के बीच करीब 10% वोट का अंतर बताया जा रहा है. इसे कम करने के लिए BJP को लगभग 5% वोट स्विंग की जरूरत होगी. राज्य के 80 हजार बूथों पर TMC का मजबूत संगठन उसकी ताकत बना हुआ है, जबकि BJP की उम्मीद ध्रुवीकरण और करीबी मुकाबले वाली सीटों पर टिकी है. कुल मिलाकर, SIR इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है, जिसने दोनों ही दलों की रणनीतियों को नई दिशा दे दी है.