डेली24 भारत डेस्क: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद में उपस्थित सांसदों की हाजिरी को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है. इस बदलाव के अनुसार, आगामी बजट सत्र से सांसद केवल अपनी निर्धारित सीटों से ही हाजिरी दर्ज कर सकेंगे. इससे पहले सदस्य लॉबी या अन्य स्थानों से भी उपस्थिति दर्ज करा सकते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है. इस कदम का मुख्य उद्देश्य सांसदों को सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करना और संसद में अनुशासन और गंभीरता बनाए रखना है.
ओम बिरला ने यह जानकारी मंगलवार को लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से साझा की. उन्होंने कहा कि अब सांसद केवल तभी अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे जब सदन चल रहा होगा. यदि किसी कारणवश सदन स्थगित हो जाता है, जैसे कि हंगामे के चलते, तो सांसद अपनी हाजिरी नहीं दर्ज करा पाएंगे. यह बदलाव संसद की पारदर्शिता और कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है.
स्पीकर ने बताया कि लोकसभा में हर सीट पर ऐसे कंसोल लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से सांसद अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं. इससे यह सुनिश्चित होगा कि हाजिरी केवल सांसदों की शारीरिक मौजूदगी का संकेत नहीं देगी, बल्कि यह भी दर्शाएगी कि उन्होंने सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग लिया. यह कदम संसदीय प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने और विधायी सत्रों की उत्पादकता बढ़ाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा की संसद में गंभीरता और अनुशासन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है. सांसदों की हाजिरी अब केवल उपस्थित रहने का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उनकी सक्रिय भागीदारी का प्रतीक होगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था आगामी बजट सत्र, जो 28 जनवरी से शुरू हो रहा है, से लागू होगी.
इस अवसर पर ओम बिरला ने भारत की सभी विधायी निकायों में नियमों और परंपराओं में एकरूपता लाने पर विचार करने के लिए एक समिति बनाने की भी घोषणा की. उन्होंने कहा कि इस समिति का उद्देश्य विभिन्न राज्य विधानसभाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और बेहतर कार्यशैली को बढ़ावा देना है. स्पीकर ने यह भी उम्मीद जताई कि यह पहल लोगों का लोकतंत्र और विधानसभाओं के प्रति विश्वास मजबूत करने में सहायक होगी. 86वें अखिल भारतीय सम्मेलन के दूसरे दिन विधानभवन के मंडप में बोलते हुए स्पीकर ने कहा कि उत्तर प्रदेश की विधानसभा जीवंत लोकतंत्र का प्रतीक है और यहां की प्रक्रियाएं अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल प्रस्तुत कर सकती हैं. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि स्थायी समिति की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई थी और भविष्य में राज्यों के विधानसभाओं में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी.
इस बदलाव से सांसदों की जिम्मेदारियों और संसदीय अनुशासन में सुधार की उम्मीद की जा रही है. इससे न केवल सांसद सदन की कार्यवाही में अधिक सक्रिय होंगे, बल्कि हाजिरी के आंकड़े भी वास्तविक उपस्थिति और सहभागिता को दर्शाएंगे. संसद में इस तरह के सुधार से विधायी प्रक्रियाओं की उत्पादकता और नीति निर्माण की गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा किए गए इस सुधार को लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और सांसदों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. यह बदलाव संसद को अधिक पारदर्शी, अनुशासित और सक्रिय बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है, जो देश के लोकतांत्रिक परिदृश्य में सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर