डेली24भारत डेस्क: बांग्लादेश की राजनीति में तेज़ी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं, और फरवरी में होने वाले आम चुनाव से पहले एक नई राजनीतिक सक्रियता सामने आई है। लंबे समय के बाद, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र, तारिक रहमान, 17 साल बाद ढाका लौट आए हैं।
ढाका एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्होंने रोड शो किया और घर तक समर्थकों के बीच यात्रा की। इसके बाद उन्होंने एक जनसभा को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सभी धर्मों के लोगों का देश है—हिंदू, मुसलमान, बौद्ध और ईसाई—और इसे एक सुरक्षित और समावेशी देश बनाना आवश्यक है।
तारिक रहमान की यह वापसी ऐसे समय हुई है, जब बांग्लादेश राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसा के दौर से गुजर रहा है। फरवरी में होने वाले आम चुनाव पर इसका सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है। हिंसा और अस्थिरता न केवल बांग्लादेश के लिए, बल्कि पड़ोसी भारत के लिए भी सुरक्षा की चिंता का कारण बन रही है। इसलिए तारिक की वापसी को भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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एयरपोर्ट पर स्वागत और सुरक्षा
तारिक रहमान अपनी पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान और बेटी बैरिस्टर जाइमा के साथ ढाका पहुंचे। एयरपोर्ट पर उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह “6,314 दिनों के बाद” बांग्लादेश लौटे हैं। अंतरिम सरकार ने उन्हें बुलेटप्रूफ कार और भारी सुरक्षा कवरेज मुहैया कराई। सेना के जवान ढाका में जगह-जगह तैनात किए गए। इस सुरक्षा व्यवस्था के लिए तारिक ने अंतरिम सरकार के चीफ मोहम्मद यूनुस को धन्यवाद भी दिया।
बोलने की आज़ादी और लोकतंत्र की वापसी
ढाका में जनसभा में तारिक ने कहा कि बांग्लादेश के लोगों को अपनी बोलने की आज़ादी और लोकतांत्रिक अधिकारों की वापसी चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि हर नागरिक—चाहे वह पुरुष हो, महिला हो या बच्चा—सुरक्षित महसूस करे और घर से बाहर निकल सके। उन्होंने देश को एक ऐसा सुरक्षित स्थान बनाने का आह्वान किया, जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग समान रूप से जीवन यापन कर सकें।
भारत के लिए महत्व
तारिक की वापसी भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शेख हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध है, और उनकी पार्टी चुनाव नहीं लड़ सकती। वहीं, प्रमुख विपक्षी नेता खालिदा जिया बीमार हैं। वर्तमान अंतरिम सरकार के दौर में भारत विरोधी और कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ा है। खासतौर पर जमात-ए-इस्लामी, जिसे पाकिस्तान की ISI से जोड़ा जाता है, की सक्रियता ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है। तारिक की छवि एक ऐसे नेता की है जो कट्टरपंथ और पाकिस्तान दोनों से दूरी बनाए रखता है।
राजनीतिक परिदृश्य और BNP की स्थिति
हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, BNP चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है, लेकिन जमात-ए-इस्लामी भी चुनावी मुकाबला दे रही है। ढाका विश्वविद्यालय में हाल में हुई छात्र संघ चुनाव में जमात की छात्र इकाई की जीत ने भारत की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। भारत BNP को अन्य विपक्षी पार्टियों की तुलना में अधिक भरोसेमंद विकल्प मान रहा है।
विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संकेत
शेख हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश ने भारत के साथ करीबी संबंध बनाए और पाकिस्तान से दूरी रखी। लेकिन यूनुस सरकार के समय पाकिस्तान के साथ संबंध बढ़े। भारत को उम्मीद है कि BNP सत्ता में आने पर विदेश नीति में संतुलन वापस आएगा। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खालिदा जिया के स्वास्थ्य पर चिंता जताई थी, जिस पर BNP ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, जिसे भारत के साथ रिश्तों में नरमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
जमात-ए-इस्लामी से दूरी
तारिक रहमान ने स्पष्ट किया है कि वे जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे और अंतरिम सरकार के अधिकारों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार को लंबे समय तक विदेश नीति तय करने का अधिकार नहीं है, जो भारत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति
इस वर्ष की शुरुआत में तारिक रहमान ने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति की घोषणा की, जिसमें उन्होंने कहा कि BNP न तो भारत के दबाव में चलेगी और न ही पाकिस्तान के।
शक्ति प्रदर्शन और रोड शो
तारिक की वापसी पर BNP ने विशाल रोड शो आयोजित किया, जिसमें पार्टी के अनुसार लगभग 50 लाख कार्यकर्ता शामिल हुए। एयरपोर्ट से उनके आवास तक का मार्ग समर्थकों से भरा रहा। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए, और अलग-अलग स्थानों से करीब 10 विशेष ट्रेनें ढाका पहुंचीं।
तारिक रहमान का परिचय
तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के पुत्र हैं और 2008 से लंदन में रह रहे थे। शेख हसीना सरकार के दौरान उन पर कई मामले दर्ज किए गए थे, जिन्हें BNP ने राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। हाल ही में उन्हें कई बड़े मामलों से बरी किया गया, जिसमें 2004 का ढाका ग्रेनेड हमला केस भी शामिल है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर