डेली24 भारत डेस्क: भारत में युवाओं की खाने-पीने की आदतों पर हाल ही में आई एक बड़ी स्टडी ने स्वास्थ्य और भोजन संबंधी गंभीर चुनौतियों की तस्वीर पेश की है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा किए गए इस अध्ययन में देश के लगभग 1.43 लाख युवाओं को शामिल किया गया. स्टडी के अनुसार, देश के हर तीसरे Gen Z युवा को हेल्दी खाना इसलिए नहीं मिलता क्योंकि उन्हें यह महंगा लगता है. इसके अलावा, करीब 15% युवाओं ने कहा कि उन्हें हेल्दी खाना स्वाद में आकर्षक नहीं लगता. यह आंकड़े यह दिखाते हैं कि केवल जागरूकता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हेल्दी फूड की कीमत और स्वाद भी बड़े कारक हैं.
सर्वे में यह भी सामने आया कि करीब 10% युवाओं के आसपास हेल्दी खाना आसानी से उपलब्ध नहीं है. इसका मतलब यह है कि भूगोल और उपलब्धता भी उनके खाने की आदतों को प्रभावित करती है. इस स्टडी ने यह भी उजागर किया कि 67.6% युवाओं ने माना कि टीवी, मोबाइल और सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले फूड विज्ञापन उनकी खाने की पसंद पर गहरा असर डालते हैं. ये विज्ञापन जंक फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की ओर युवाओं को आकर्षित करते हैं.
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) की रिपोर्ट के अनुसार, 24% भारतीय महिलाएं और 23% पुरुष अधिक वजन या मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं. इसी तरह, 15-49 साल की उम्र वर्ग में 6.4% महिलाएं और 4% पुरुष मोटापे से प्रभावित हैं. पांच साल से कम उम्र के बच्चों में भी अधिक वजन के मामले बढ़कर 3.4% हो गए हैं, जो NFHS-4 की तुलना में चिंताजनक वृद्धि है.
हेल्दी खाना पड़ता है महंगा…रिसर्च में Gen Z ने किया खुलासा!#HealthyFood #JunkFood #obesity pic.twitter.com/nFJkahGlrZ
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) December 23, 2025
ICMR और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ कि युवाओं की फूड चॉइस पर विज्ञापनों का गहरा प्रभाव है. टीवी, मोबाइल और सोशल मीडिया पर आने वाले विज्ञापन जंक फूड और अस्वास्थ्यकर विकल्पों की ओर आकर्षित करते हैं. डॉक्टर टीना रावल, जो बीएमसी न्यूट्रीशन जर्नल में इस अध्ययन की मुख्य लेखिका हैं, बताती हैं कि केवल सलाह देना पर्याप्त नहीं है. किशोरों और युवाओं की सेहत सुधारने के लिए हेल्दी खाने को सस्ता, स्वादिष्ट और आसानी से उपलब्ध बनाना जरूरी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्दी खाने को आकर्षक बनाना भी महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, फूड लेबलिंग को सरल और समझने योग्य बनाने की आवश्यकता है. विज्ञापनों पर नियंत्रण और स्कूल-कॉलेज स्तर पर बेहतर फूड एनवायरनमेंट तैयार करना भी समय की मांग है. इससे न केवल युवा वर्ग के खाने की आदतों में सुधार आएगा, बल्कि मोटापे और उससे जुड़े रोगों की रोकथाम भी होगी. स्टडी से यह भी पता चला कि हेल्दी खाने की ओर बढ़ने में सामाजिक और आर्थिक बाधाएं बड़ी भूमिका निभाती हैं. महंगे खाद्य पदार्थ और उनकी उपलब्धता की कमी युवाओं को जंक फूड की ओर धकेलती है. इसके अलावा, स्वाद का कारक भी निर्णायक होता है, क्योंकि युवाओं का झुकाव अधिकतर स्वादिष्ट और त्वरित खाद्य विकल्पों की ओर होता है.
एक ओर जहां विज्ञापन युवाओं की पसंद को प्रभावित करते हैं, वहीं दूसरी ओर, सरकार और संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे स्वस्थ विकल्पों को लोकप्रिय और सुलभ बनाएं. स्कूल और कॉलेज में हेल्दी कैंटीन, फूड फेस्टिवल और पोषण कार्यक्रमों का आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि युवा पीढ़ी को स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए जागरूक करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए व्यवहारिक और व्यावहारिक समाधान भी जरूरी हैं.
कुल मिलाकर, भारत में Gen Z और युवा वर्ग की खाने की आदतें न केवल उनके व्यक्तिगत स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती हैं. हेल्दी खाने की महंगाई, उपलब्धता की कमी, स्वाद की प्राथमिकताएं और विज्ञापनों का प्रभाव मिलकर युवाओं को अस्वास्थ्यकर विकल्पों की ओर ले जाते हैं. इस समस्या से निपटने के लिए सस्ती, स्वादिष्ट और आसानी से उपलब्ध हेल्दी फूड की पहुंच सुनिश्चित करना, फूड लेबलिंग सरल बनाना और स्कूल-कॉलेज स्तर पर स्वस्थ खाने का वातावरण तैयार करना अत्यंत जरूरी है. यदि इन कदमों को गंभीरता से अपनाया जाए, तो न केवल मोटापे और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में कमी आएगी, बल्कि युवा पीढ़ी की जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव होगा. यह एक सामूहिक प्रयास है जिसमें सरकार, शिक्षा संस्थान, परिवार और समाज सभी की भूमिका अहम है. स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूक युवा ही स्वस्थ और विकसित राष्ट्र का आधार हैं.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर