डेली24 भारत डेस्क: पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर बड़े भूचाल से गुजर रही है. देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में करारा झटका लगा है. फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की विशेष अदालत ने तोशाखाना-II भ्रष्टाचार मामले में दोनों को दोषी करार देते हुए 17-17 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है. यह फैसला न केवल इमरान खान के राजनीतिक भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि पाकिस्तान की सत्ता और जवाबदेही की व्यवस्था पर भी नई बहस को जन्म देता है.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला वर्ष 2021 से जुड़ा हुआ है, जब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान को एक अत्यंत कीमती बुल्गारी ज्वेलरी सेट उपहार में दिया गया था. नियमों के अनुसार, तोशाखाना में जमा किए गए उपहारों को निर्धारित प्रक्रिया और मूल्यांकन के बाद ही खरीदा जा सकता है, लेकिन जांच में सामने आया कि इस ज्वेलरी सेट की वास्तविक बाजार कीमत 7 करोड़ 15 लाख पाकिस्तानी रुपये से अधिक थी, जबकि इसे मात्र 58 लाख रुपये में खरीद लिया गया. अदालत ने इसे सरकारी नियमों का उल्लंघन, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्ट आचरण माना.
पाकिस्तान: करप्शन केस में बड़ा फैसला,पाकिस्तानी अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को 17-17 साल की जेल की सज़ा सुनाई। अदालत ने दोनों को भ्रष्टाचार मामले में दोषी करार दिया।#ImranKhan #BushraBibi #Pakistan pic.twitter.com/73mx37vdG9
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विशेष अदालत के फैसले के अनुसार, इमरान खान को आपराधिक विश्वासघात के मामले में 10 साल और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 7 साल की सजा सुनाई गई है. इसी प्रकार, बुशरा बीबी को भी समान धाराओं के अंतर्गत कुल 17 साल की सजा दी गई है. इसके अलावा, अदालत ने दोनों पर 1 करोड़ 64 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यदि जुर्माने की राशि अदा नहीं की जाती है, तो दोनों को अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी.यह महत्वपूर्ण फैसला रावलपिंडी की अदियाला जेल में बनाए गए विशेष कोर्ट रूम में सुनाया गया. विशेष न्यायाधीश शाहरुख अरजुमंद ने विस्तृत सुनवाई के बाद दोनों को दोषी ठहराया. उल्लेखनीय है कि इमरान खान अगस्त 2023 से ही विभिन्न कानूनी मामलों में जेल में बंद हैं और लगातार अदालतों के चक्कर काट रहे हैं.
यह पहला मामला नहीं है जिसमें इमरान खान और बुशरा बीबी को सजा मिली हो. इससे पहले जनवरी 2025 में अल-कादिर ट्रस्ट मामले में भी अदालत ने इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा सुनाई थी. हालांकि, तोशाखाना-I मामले में अप्रैल 2024 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी थी, जिससे इमरान खान को अस्थायी राहत मिली थी. तोशाखाना-II मामले के फैसले के बाद इमरान खान की कानूनी टीम ने संकेत दिए हैं कि वे इस फैसले को भी इस्लामाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। उनके वकीलों का दावा है कि यह फैसला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और कानूनी रूप से कमजोर आधारों पर दिया गया है। वहीं, सरकार और अभियोजन पक्ष का कहना है कि यह फैसला कानून के अनुसार और ठोस सबूतों के आधार पर सुनाया गया है।
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तोशाखाना-II मामले में आया यह फैसला पाकिस्तान की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है. एक ओर यह सत्ता में रहे नेताओं की जवाबदेही को रेखांकित करता है, तो दूसरी ओर यह सवाल भी उठाता है कि क्या पाकिस्तान की न्यायिक प्रक्रिया राजनीतिक दबावों से पूरी तरह मुक्त है. आने वाले दिनों में हाईकोर्ट और संभवतः सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई न केवल इमरान खान के भविष्य को तय करेगी, बल्कि पाकिस्तान की लोकतांत्रिक और कानूनी व्यवस्था की दिशा भी निर्धारित करेगी.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर