Daily 24 भारत डेस्क: दिल्ली की तीनों लैंडफिल साइट्स में से सबसे ज्यादा कूड़ा गाजीपुर लैंडफिल साइट पर ही पड़ा हुआ है. इसी लैंडफिल साइट पर कूड़ा प्रोसेस करने का काम बहुत धीमा चल रहा है. दिवाली से पहले दो बार ही कूड़ा प्रोसेस करने का आंकड़ा 3900-4500 मीट्रिक टन तक पहुंचा लेकिन प्रोसेस करने का आंकड़ा एक हजार मीट्रिक टन को भी नहीं छू पाया. एमसीडी सीनियर अधिकारी ने बताया कि इसीलिए गाजीपुर लैंडफिल सहित बाकी दोनों लैंडफिल साइट्स पर अलग से एक एक कंपनी लगाने का फैसला लिया गया है. इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है.
दिल्ली में आमतौर पर हर रोज 11,000 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है. लगभग 4000 मीट्रिक टन कूड़ा ऐसा है जो कहीं पर भी ठिकाने नहीं लग पा रहा है. इसलिए उसे गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल साइट पर ठिकाने लगाया जा रहा है. दिवाली से ठीक पहले और दिवाली के बाद कूड़े की मात्रा 14,000 मीट्रिक टन को भी पार कर गई. डेम्स कमिटी के चेयरमैन संदीप कपूर ने भी माना कि गाजीपुर में कूड़ा प्रोसेस का काम बेहद ढीला है. दिल्ली की तीनों लैंडफिल साइट पर बने कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के लिए जितनी चिंतित एमसीडी है, दिल्ली सरकार भी उत्तनी ही चिंतित है. इसके लिए स्पेशल फंड भी उपलब्ध कराया गया. जिससे लैंडफिल साइट्स पर चल रही कूड़ा प्रोसेस करने के काम को रफ्तार दी जा सके. अब आकर केंद्र ने भी लैंडफिल साइट्स को खत्म करने के लिए यह घोषणा की है कि दिसंबर 2026 तक तीनो लैंडफिल साइट्स के कूड़े को खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन जिस कंपनी को गाजीपुर लैंडफिल साइट के कूड़े को प्रोसेस करने की जिम्मेदारी सौपी हुई है वह एमसीडी, दिल्ली सरकार और केंद्र के दावों को ठेंगा दिखा रही है.
अलोक मैसी