डेली24भारत डेस्क: कार्तिक पूर्णिमा 2025 — एक ऐसा दिन जो हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र, शुभ और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। यह दिन केवल एक पर्व नहीं बल्कि भक्ति, प्रकाश, दान और पुण्य का संगम है। इस तिथि पर मनाई जाने वाली देव दीपावली को देवताओं की दीपावली कहा जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवता स्वयं स्वर्गलोक से पृथ्वी पर उतरकर काशी (वाराणसी) के गंगाघाटों को दीपों से प्रकाशित करते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा 2025 की तिथि और समय
इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा की शुरुआत 4 नवंबर को रात 10:36 बजे से होगी और यह 5 नवंबर को शाम 6:48 बजे समाप्त होगी।
उदयातिथि के अनुसार देव दीपावली बुधवार, 5 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी। यह तिथि धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी मानी जाती है, क्योंकि इस दिन स्नान, दान, पूजा और दीपदान करने से अनंत पुण्य प्राप्त होता है और व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है।
देव दीपावली का धार्मिक महत्व
पुराणों में उल्लेख है कि त्रिपुरासुर नामक दैत्य का वध भगवान शिव ने इसी दिन किया था। इस विजय के उपलक्ष्य में देवताओं ने आनंदपूर्वक दीप प्रज्ज्वलित किए थे। तभी से यह दिन देव दीपावली के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस दिन गंगा स्नान और दीपदान का विशेष महत्व होता है। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा में स्नान करते हैं, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। अगर कोई गंगा तक नहीं पहुंच सकता, तो वह घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करे। स्नान के बाद भगवान विष्णु, शिवजी, लक्ष्मी और तुलसी माता की पूजा करें तथा दीपदान और दान करें।
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, दान और दीपदान के शुभ मुहूर्त
- प्रदोष काल (देव दीपावली का समय): शाम 5:15 बजे से 7:50 बजे तक
- स्नान मुहूर्त: सूर्योदय से शाम 5:01 बजे तक
- दान मुहूर्त: सूर्योदय से शाम 5:12 बजे तक
- दीपदान मुहूर्त: शाम 5:15 से 7:51 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:46 से 5:37 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:56 से 2:41 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:40 से 6:05 बजे तक
- चंद्रोदय: शाम 7:20 बजे
कार्तिक पूर्णिमा पर क्या करें?
- गंगा स्नान या गंगाजल स्नान:
इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने का विशेष महत्व है। यह शरीर और आत्मा दोनों को पवित्र करता है। - भगवान विष्णु और शिव की पूजा:
तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और भगवान विष्णु का ध्यान करें। साथ ही भगवान शिव को जल, बेलपत्र, और धतूरा अर्पित करें। - दान-पुण्य करें:
इस दिन तिल, आंवला, गुड़, वस्त्र, अन्न और दीपदान का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इससे व्यक्ति के जीवन में संपन्नता और सौभाग्य बढ़ता है। - दीपदान:
सूर्यास्त के बाद घर, मंदिर, या गंगा तट पर दीप जलाएं। हर दीप आत्मा के अंधकार को मिटाने का प्रतीक है।
कार्तिक पूर्णिमा की आध्यात्मिक महिमा
यह दिन अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इस रात जब गंगा किनारे हजारों दीप जलाए जाते हैं, तब पृथ्वी पर स्वयं देवता उतरकर उस दिव्यता को अनुभव करते हैं। जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा, व्रत और दान करता है, उसके जीवन में समृद्धि, सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कार्तिक पूर्णिमा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यह मानव और देवत्व के मिलन का पर्व है। यह वह रात है जब गंगा के तट दीपों की अनगिनत पंक्तियों से जगमगा उठते हैं, वातावरण में मंत्रों की ध्वनि और भक्ति की आभा फैल जाती है, और हर मन प्रकाश, श्रद्धा और ईश-भक्ति से भर उठता है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि जैसे दीप अंधकार को दूर करता है, वैसे ही भक्ति और दान हमारे जीवन के अंधकार को मिटाकर आध्यात्मिक प्रकाश फैलाते हैं।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर