डेली24भारत डेस्क: अक्टूबर का महीना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए काफी सकारात्मक साबित हुआ। त्योहारों के इस मौसम में जहां देशभर में रौनक और खरीदारी का माहौल रहा, वहीं आर्थिक गतिविधियों में भी तेज़ी दर्ज की गई। दिवाली और अन्य पर्वों के दौरान लोगों की खर्च करने की क्षमता में बढ़ोतरी दिखी, जिसका सीधा असर बाजारों और निवेश पर पड़ा। शेयर मार्केट में निवेशकों ने इस महीने लगभग 19 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 4.57 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि त्योहारी खरीदारी, मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों और सकारात्मक घरेलू मांग ने इस तेजी को बल दिया।
इसी अवधि में ऊर्जा क्षेत्र से भी अच्छे संकेत मिले। पेट्रोल की खपत अक्टूबर में पिछले पांच महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। तेल उद्योग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, देश में पेट्रोल की खपत पिछले साल की तुलना में 7 प्रतिशत बढ़कर 36.5 लाख टन हो गई। पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग 34 लाख टन था। इसका मतलब है कि त्योहारी सीजन में लोगों ने अधिक यात्रा की — चाहे वह अपने गृहनगर जाना हो, छुट्टियां मनाना हो या शॉपिंग के लिए बाहर निकलना।
हालांकि, डीजल की मांग में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया। यह लगभग स्थिर रही और मामूली गिरावट के साथ 76 लाख टन पर दर्ज की गई। पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 76.4 लाख टन था। इसका मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों में इस अवधि में कोई बड़ी वृद्धि नहीं हुई।दूसरी ओर, रसोई गैस (एलपीजी) की मांग में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली। अक्टूबर महीने में एलपीजी की बिक्री 5.4 प्रतिशत बढ़कर 30 लाख टन तक पहुंच गई। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत 25 लाख नए गैस कनेक्शन जारी किए जाने से घरेलू गैस की मांग में उछाल आया है। नए उपभोक्ताओं के जुड़ने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में एलपीजी की खपत तेजी से बढ़ रही है।
यदि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत से अब तक के सात महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो ईंधन की कुल खपत में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। अप्रैल से अक्टूबर के बीच पेट्रोल की खपत 6.8 प्रतिशत बढ़कर 2.48 करोड़ टन, डीजल की बिक्री 2.45 प्रतिशत बढ़कर 5.33 करोड़ टन, और एलपीजी की मांग 7.2 प्रतिशत बढ़कर 1.97 करोड़ टन हो गई।इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत में उपभोग और ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। यह न केवल अर्थव्यवस्था के सक्रिय होने का संकेत है बल्कि यह भी दिखाता है कि भारतीय उपभोक्ता अब खर्च करने को लेकर अधिक आत्मविश्वासी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रफ्तार इसी तरह बनी रही तो आने वाले महीनों में भारत की आर्थिक वृद्धि और तेज़ हो सकती है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर