Daily 24 भारत डेस्क: जम्मू-कश्मीर का प्रसिद्ध पर्यटन पहलगाम की बैसरन वैली पिछले एक साल से बंद है और इसका सीधा असर वहां की पोनी कारोबार से जुड़े परिवारों पर पड़ा है.22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले के बाद सुरक्षा कारणों से इस खूबसूरत घास के मैदान को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था. इस हमले में 26 लोगों ने अपनी जान गवांई थी और पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी. हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों पर डाली गई थी, जिसके बाद भारत ने कड़ी कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था.
हमले के एक साल बाद भी बैसरन वैली वीरान पड़ी है. यह वही जगह है जिसे “मिनी स्विट्जरलैंड” कहा जाता है, जहां हर साल हजारों सैलानी घूमने आते थे. लेकिन अब वहां सन्नाटा पसरा है, और सबसे ज्यादा मार पड़ी है उन 5 से 6 हजार परिवारों पर जो पोनी कारोबार से जुड़े हुए हैं. ये लोग पर्यटकों को पहाड़ी रास्तों पर सैर कराते थे और इसी से उनका घर चलता था.
पोनी एसोसिएशन से जुड़े रऊफ वानी बताते हैं कि यह संकट सिर्फ पोनी वालों तक सीमित नहीं है.“जब बैसरन बंद हुआ, तो पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था ठप हो गई. कैब ड्राइवर, होटल स्टाफ, दुकानदार, शॉल बेचने वाले, चाय और खाने-पीने की छोटी दुकानें सभी की आय पर असर पड़ा है.” उनका कहना है कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे है इसलिए सरकार को अब वैली खोलने पर विचार करना चाहिए.
स्थानीय पोनी मालिक मोहम्मद यूसुफ की कहानी इस दर्द को और गहराई से बयान करती है. वे कहते हैं, “उस दिन दो तरह की मौतें हुईं, एक उन लोगों की जिन्हें गोली मारी गई, और दूसरी हमारी, जिनसे उनका काम छिन गया. हम ज़िंदा लाश बन गए हैं.” उनकी आंखों में आज भी उस दिन की तस्वीरें ताजा हैं, जब निर्दोश पर्यटकों की बेरहमी से हत्या कर ही गई.
आर्थिक तंगी का आलम यह है कि वहां रहने वाले कई परिवारों के पास दो वक्त का खाना जुटाना भी मुश्किल हो गया है. पोनी कारोबारी बताते हैं कि उनके घोड़ों और खच्चरों को भी पर्याप्त चारा नहीं मिल पा रहा, जिससे उनकी हालत खराब होती जा रही है. कुछ लोग कर्ज में डूब गए हैं, तो कुछ ने अपने जानवर तक बेचने शुरू कर दिए हैं.
हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई कड़ी पूछताछ ने भी स्थानीय लोगों के मन में डर बैठा दिया. कई पोनी कारोबारियों का कहना है कि उन्हें बार-बार बुलाकर पूछताछ की गई, जिससे वे मानसिक रूप से भी परेशान हो गए. आज भी कई लोग खुलकर सामने आने से हिचकते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि बैसरन वैली की खूबसूरती का कोई मुकाबला नहीं है. पर्यटक खासतौर पर इसी जगह का लुफ्त उठाने के लिए दूर-दूर से आते थे. बेताब वैली या अन्य जगहों पर जाने से उन्हें वह अनुभव नहीं मिलता था. सैलानियों का असली आकर्षण बैसरन ही था, जहां पर्यटक खुशी-खुशी इनाम तक देते थे.
अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हुई हैं. लोग उपराज्यपाल से अपील कर रहे हैं कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए बैसरन वैली को दोबारा खोल दिया जाए उनका कहना है कि अगर जल्द कोई फैसला नहीं लिया गया, तो हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी.
बैसरन वैली सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका का आधार है. यहां की खामोशी सिर्फ एक जगह के बंद होने की कहानी नहीं बल्कि उन लोगों के टूटते सपनों की कहानी है जो हर दिन इस उम्मीद में जी रहे हैं कि एक दिन फिर से पर्यटक आएंगे और उनकी जिंदगी एक बार फिर पटरी पर लौटेगी.