Daily 24 भारत डेस्क: भारत के वित्तीय बाजारों में इस साल विदेशी निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर पूंजी निकासी दर्ज की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने अब तक लगभग 17 अरब डॉलर यानी करीब 1.50 लाख करोड़ रुपये भारतीय शेयर बाजारों से निकाल लिए हैं। इस भारी निकासी ने सरकार और आर्थिक संस्थानों को चिंता में डाल दिया है।इसी के चलते केंद्र सरकार अब वित्तीय क्षेत्र में बड़े सुधारों की दिशा में काम कर रही है। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेशकों को दोबारा आकर्षित करना और देश में निवेश माहौल को और बेहतर बनाना है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की टैरिफ नीतियों, ब्याज दरों में बढ़ोतरी और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता की वजह से विदेशी निवेशक एशियाई बाजारों, खासकर भारत से पूंजी निकाल रहे हैं। इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की मजबूती पर पड़ रहा है।
इस स्थिति से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल के महीनों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें शामिल हैं:
- कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग की प्रक्रिया आसान बनाना
- विदेशी बैंकों और फंडों के निवेश नियमों में ढील देना
- और बैंकों को मर्जर (विलय) और लोन वितरण के लिए प्रोत्साहित करना
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले 6 से 12 महीनों में सरकार और वित्तीय नियामक संस्थान और भी सुधारों पर विचार कर रहे हैं। इनमें छोटे शहरों और कस्बों के आम निवेशकों को शेयर बाजार में जोड़ने, बैंकिंग सेक्टर को अधिक लचीला और पारदर्शी बनाने जैसे कदम शामिल हैं।इन सभी उपायों का लक्ष्य है भारत के 260 अरब डॉलर के वित्तीय क्षेत्र को मजबूत बनाना और वैश्विक स्तर पर इसे एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना।सरकार का यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है, जिसके तहत देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के बीच स्थिर और सशक्त बनाए रखने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर