Daily 24 भारत डेस्क: छठ पूजा के दौरान व्रती महिलाएं 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती हैं और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इस समय नाक से लेकर माथे तक लंबा सिंदूर लगाने की परंपरा होती है, जो सुहाग, पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली का प्रतीक मानी जाती है।
छठ पूजा एक पवित्र त्योहार है जो संतान की लंबी उम्र, परिवार की खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य के लिए मनाया जाता है। यह सिर्फ धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि सूर्य देव और प्रकृति की पूजा का पर्व भी है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं, सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं और पूरे सोलह श्रृंगार के साथ पूजा करती हैं। इस दिन मेहंदी लगाना, मांग में सिंदूर भरना और सजना-संवरना शुभ माना जाता है। आम दिनों में जहां सिंदूर सिर्फ मांग तक लगाया जाता है, वहीं छठ पूजा के दिन इसे नाक से लेकर मांग तक भरा जाता है। यह परंपरा बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में पीढ़ियों से चली आ रही है। ऐसा माना जाता है कि लंबा सिंदूर सुहाग की शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। यह न सिर्फ पति-पत्नी के रिश्ते की मजबूती दर्शाता है, बल्कि परिवार के सुख और समृद्धि की कामना का प्रतीक भी है।

लंबा सिंदूर सुखी दांपत्य और पति की लंबी उम्र का प्रतीक
छठ पूजा के समय सुहागिन महिलाएं नाक से लेकर मांग तक लंबा सिंदूर लगाती हैं। इसे पति की लंबी उम्र और खुशहाल दांपत्य जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं लाल नहीं, बल्कि नारंगी रंग का सिंदूर लगाती हैं, क्योंकि नारंगी रंग सूर्य का प्रतीक होता है और छठ पर्व सूर्य देव की पूजा का दिन है। माना जाता है कि नारंगी सिंदूर लगाने से सूर्य देव की विशेष कृपा मिलती है। साथ ही यह भी विश्वास है कि जितना लंबा सिंदूर होगा, महिला का वैवाहिक जीवन उतना ही सुखी और लंबा होगा।
पौराणिक कथा
एक पौराणिक कहानी के अनुसार, वीरवान नाम का एक बहादुर युवक था जो जंगल में शिकार करने में बहुत माहिर था। एक दिन उसने धीरमति नाम की युवती को जंगली जानवरों से बचाया। इसके बाद दोनों साथ रहने लगे। कुछ समय बाद कालू नाम का व्यक्ति वीरवान पर हमला करता है। तब धीरमति साहस दिखाकर कालू से लड़ती है और उसे हरा देती है। इस दौरान उसके हाथों पर लगे खून से उसका माथा और ललाट लाल हो जाता है। कहा जाता है कि तभी से सिंदूर को वीरता, प्रेम और सम्मान का प्रतीक माना जाने लगा। छठ पूजा पर नाक तक सिंदूर लगाने की परंपरा भी इसी भावना से जुड़ी है — ताकि पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना पूरी हो सके।
महाभारत में द्रौपदी का उदाहरण
महाभारत के समय की एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, द्रौपदी भी लंबे सिंदूर लगाती थीं। जब पांडव जुए में हार गए और दुशासन उन्हें सभा में खींचने आया, तब द्रौपदी ने जल्दी में पूरी सिंदूरदानी अपने माथे पर उड़ेल ली। इससे उसका माथा और नाक तक का हिस्सा सिंदूर से भर गया। कहा जाता है कि सुहागिन स्त्री अपने पति के सामने बिना सिंदूर के नहीं जाती, इसलिए द्रौपदी ने ऐसा किया। इसके बाद महाभारत युद्ध तक द्रौपदी ने लंबा सिंदूर लगाना जारी रखा।