पश्चिम एशिया पर मंडराता युद्ध का साया, क्या अमेरिका-ईरान टकराव से भड़क उठेगी महाविनाश की आग?
डेली24भारत डेस्क: संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब अत्यंत गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना कथित रूप से एक व्यापक और लंबी अवधि तक चलने वाले सैन्य अभियान की तैयारी कर रही है, जिसे ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा सकता है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि यह अभियान कई सप्ताह तक चल सकता है। इस सूचना के बाद पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध की आशंका और प्रबल हो गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद की शुरुआत हुई थी। ओमान में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों की बैठक हुई थी, जिसमें तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा की गई। इस वार्ता को तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा था, किंतु नई सैन्य तैयारियों की खबरों ने उस प्रक्रिया पर अनिश्चितता की छाया डाल दी है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका क्षेत्र में दूसरा विमानवाहक पोत भेज रहा है। इसके साथ हजारों अतिरिक्त सैनिक, आधुनिक लड़ाकू विमान, निर्देशित मिसाइलों से लैस युद्धपोत और उन्नत रक्षा प्रणालियां भी तैनात की जा रही हैं। यह सैन्य जमावड़ा संभावित आक्रमण के साथ-साथ जवाबी हमलों से बचाव के उद्देश्य से किया जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता करना कठिन रहा है और कभी-कभी सख्त रुख अपनाना आवश्यक हो जाता है। उनके इस बयान के बाद संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि सभी विकल्प खुले हैं, परंतु किसी विशिष्ट योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रक्षा विभाग ने इस विषय पर टिप्पणी करने से इनकार किया है, लेकिन पिछले अनुभव संकेत देते हैं कि अमेरिका बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता रखता है। पूर्व में ईरान के परमाणु ठिकानों पर सीमित हमला किया जा चुका है, जिसमें दूरगामी बमवर्षक विमानों का उपयोग हुआ था। किंतु इस बार की तैयारियां पहले की तुलना में अधिक व्यापक और दीर्घकालिक बताई जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर हमला करना सरल नहीं होगा। ईरान के पास क्षेत्र में मिसाइलों का विशाल भंडार है, जो अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। यदि ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो यह संघर्ष तेजी से फैल सकता है और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
वर्तमान स्थिति अत्यंत संवेदनशील है। कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य तैयारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश जारी है, लेकिन किसी भी गलत कदम से पूरा क्षेत्र बड़े संघर्ष की आग में घिर सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वार्ता का मार्ग आगे बढ़ता है या परिस्थितियां युद्ध की दिशा में मुड़ जाती हैं।