डेली24भारत डेस्क: स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे प्रतिस्पर्धी देश बन गया है। यह रैंकिंग इस बात का संकेत है कि भारत का तेजी से विकसित होता तकनीकी इकोसिस्टम और मजबूत तकनीकी प्रतिभा आधार उसे वैश्विक AI परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बना रहे हैं।
ब्रिटेन, जापान और फ्रांस से भी आगे
स्टैनफोर्ड के डेटा पर आधारित विजुअल कैपिटलिस्ट के चार्ट के अनुसार, अमेरिका इस क्षेत्र में 78.6 के वाइब्रेंसी स्कोर के साथ शीर्ष पर है। चीन 36.95 के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि भारत 21.59 के स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर है। इस सफलता के साथ ही भारत दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, जापान, कनाडा, जर्मनी और फ्रांस जैसे विकसित देशों को पीछे छोड़ चुका है।
India AI Impact सम्मेलन: भारत की वैश्विक नेतृत्व की भूमिका
आगामी India AI Impact Summit में भारत वैश्विक एआई मानकों को स्थापित करने के लिए विभिन्न देशों के साथ सहमति बनाने का प्रयास करेगा। यह सम्मेलन 19-20 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होगा और इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI का विकास और उपयोग सभी देशों और समाजों के लिए समान रूप से लाभकारी और जिम्मेदार हो।
वैश्विक प्रतिभागियों की उपस्थिति
इस शिखर सम्मेलन में न केवल ग्लोबल साउथ के देशों, बल्कि अमेरिका, चीन और अन्य प्रमुख देशों के 100 से अधिक CEO भी हिस्सा लेंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत पहले से ही इन बहुपक्षीय चर्चाओं का हिस्सा है और सभी भारतीय एजेंसियों और मंत्रालयों ने AI मानकों के विकास में योगदान किया है।
सम्मेलन की तीन प्रमुख धुरी और सात चरण
सम्मेलन तीन मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित होगा, जिनके तहत AI के वैश्विक उपयोग में न्यूनतम मानकों को लागू किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- लाभ का समान वितरण: AI के फायदे सभी वर्गों और समुदायों तक समान रूप से पहुँचें।
- संसाधनों तक लोकतांत्रिक पहुँच: डेटासेट, कंप्यूटिंग पावर और AI मॉडल तक सभी देशों और संस्थाओं की पहुँच सुनिश्चित करना।
- महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुप्रयोग: स्वास्थ्य, शिक्षा, शासन और कृषि जैसे क्षेत्रों में AI के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग को बढ़ावा देना।
ओपन सोर्स एआई संसाधनों की पहल
भारत स्वास्थ्य सेवा, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में AI उपयोग के मामलों का एक ओपन सोर्स भंडार स्थापित करने की योजना बना रहा है। इससे ग्लोबल साउथ के देशों में AI के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, भारत कंप्यूटर डेटा, एल्गोरिदम और AI टूल्स के लिए ओपन एक्सेस प्लेटफ़ॉर्म विकसित करने पर भी काम कर रहा है।
2024-25 में भारत की रणनीतिक तैयारी
2024 के अंत में अंतर-संसदीय संघ ने संसदों के लिए AI दिशानिर्देश जारी किए, जिससे सांसद AI को जिम्मेदारीपूर्वक और प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। इसी बीच, जी20 और जी7 समूहों ने सार्वजनिक क्षेत्र में AI के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों और आचार संहिताओं का समर्थन किया। इन तैयारियों ने भारत को वैश्विक AI नेतृत्व की दिशा में मजबूती दी।
भारत: ग्लोबल साउथ का अगुवा
ग्लोबल साउथ में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील और कम विकसित देशों को शामिल किया जाता है। भारत की तेजी से बढ़ती AI क्षमता उसे इस समूह का नेतृत्व करने योग्य बना रही है। इससे अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच चिंता की संभावना है कि ग्लोबल साउथ अधिक सक्षम और प्रभावशाली बन सकता है।
भारत न केवल AI के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है, बल्कि वैश्विक मानकों और नैतिक दिशा-निर्देशों को निर्धारित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। India AI Impact Summit इसे ग्लोबल साउथ में AI नेतृत्व के केंद्र के रूप में स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर